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Monday, May 14, 2018
36 गुर्जर जोड़ों ने एक साथ लिए फेरे
Wednesday, May 02, 2018
Friday, December 21, 2012
गुर्जर प्रतिभा छात्रवृत्ति फार्म भरने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर
देव धाम जोधपुरिया लक्खी मेले में किया जाएगा प्रतिभाओं का सम्मान
(निवाई-टोंक कजोड़ मल पोसवाल मो09252007022 ). देवनारायण जन्मोत्सव पर देव धाम जोधपुरिया में भरने वाले लक्खी मेले में टोंक जिले के गुर्जर समाज के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को छात्रवृति दी जाएगी। इसके लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 दिसम्बर है। समारोह के अध्यक्ष डॉ.के.एल गुर्जर ने बताया कि छात्रवृत्ति शिव-साधना चैरिटेबल ट्रस्ट तिलक नगर जयपुर की ओर से दी जाएगी।
(निवाई-टोंक कजोड़ मल पोसवाल मो09252007022 ). देवनारायण जन्मोत्सव पर देव धाम जोधपुरिया में भरने वाले लक्खी मेले में टोंक जिले के गुर्जर समाज के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को छात्रवृति दी जाएगी। इसके लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 दिसम्बर है। समारोह के अध्यक्ष डॉ.के.एल गुर्जर ने बताया कि छात्रवृत्ति शिव-साधना चैरिटेबल ट्रस्ट तिलक नगर जयपुर की ओर से दी जाएगी।
Wednesday, September 26, 2012
कैमरी में प्रतिभा सम्मान समारोह 4 नवम्बर को
http://bagdawat.com/?p=342
कैमरी (सुरेन्द्र खटाना). गुर्जर समाज की पत्रिका जगदीशधाम देववाणी की ओर से गुर्जर समाज का प्रतिभा सम्मान समारोह जगदीशधाम भवन कैमरी में 4 नवंबर को होगा।
कैमरी (सुरेन्द्र खटाना). गुर्जर समाज की पत्रिका जगदीशधाम देववाणी की ओर से गुर्जर समाज का प्रतिभा सम्मान समारोह जगदीशधाम भवन कैमरी में 4 नवंबर को होगा।Monday, August 27, 2012
कांग्रेस टिकट के सौदागर हैं भड़ाना
बैसला पर आरोप लगाने पर कैप्टन जगराम सिंह ने दिया जवाब
हिंडौन सिटी. गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष कै. जगराम सिंह ने पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना को कांग्रेस टिकट का सौदागर बताया है। उन्होंने कहा कि भड़ाना आरक्षण के लिए लड़ाई का बहाना बनाकर सरकार से अपना कांग्रेस टिकट पक्का करने की जुगत में है।
पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना ने गुरुवार को यहां गुर्जर आरक्षण आंदोलन के मुखिया कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला पर राजनीतिक लाभ लेने के आरोप लगाए थे। इन आरोपों के जबाव में आरक्षण संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष कैप्टन जगराम सिंह ने शुक्रवार को मीडियाकर्मियों से कहा कि कर्नल बैसला पर आरोप लगाने वाले अतर सिंह भड़ाना का कोई स्तर नहीं है। भड़ाना पहले भाजपा में थे। बाद में कांग्रेसी बन गए। कुछ दिन तक प्रहलाद गुंजल के साथ रहे। बाद में उन्हें छोड़कर कहीं और चले गए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की कारगुजारियों से गुर्जर समाज वाकिफ हो चुका है। उन्होंने कहा कि चुनाव नजदीक आते ही कुछ लोग कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला पर आरोप लगाकर सरकार को अपना महत्व बताने का कृत्य करते हैं।
उपाध्यक्ष जगराम सिंह ने कहा कि तिमनगढ़ के पास सागर में गुर्जर नेता जोनपुरिया ने समाज को जो संदेश दिया था, उस संदेश कर्नल बैसला के नेतृत्व में लड़ाई लडऩे और वोटों का फैसला करने पर गुर्जर समाज अटल है। गुर्जर समाज को जब तक 5 प्रतिशत आरक्षण नहीं मिलेगा, तब तक कर्नल बैसला संघर्ष जारी रखेंगे।
(source : dainik bhaskar)
पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना ने गुरुवार को यहां गुर्जर आरक्षण आंदोलन के मुखिया कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला पर राजनीतिक लाभ लेने के आरोप लगाए थे। इन आरोपों के जबाव में आरक्षण संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष कैप्टन जगराम सिंह ने शुक्रवार को मीडियाकर्मियों से कहा कि कर्नल बैसला पर आरोप लगाने वाले अतर सिंह भड़ाना का कोई स्तर नहीं है। भड़ाना पहले भाजपा में थे। बाद में कांग्रेसी बन गए। कुछ दिन तक प्रहलाद गुंजल के साथ रहे। बाद में उन्हें छोड़कर कहीं और चले गए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की कारगुजारियों से गुर्जर समाज वाकिफ हो चुका है। उन्होंने कहा कि चुनाव नजदीक आते ही कुछ लोग कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला पर आरोप लगाकर सरकार को अपना महत्व बताने का कृत्य करते हैं।
उपाध्यक्ष जगराम सिंह ने कहा कि तिमनगढ़ के पास सागर में गुर्जर नेता जोनपुरिया ने समाज को जो संदेश दिया था, उस संदेश कर्नल बैसला के नेतृत्व में लड़ाई लडऩे और वोटों का फैसला करने पर गुर्जर समाज अटल है। गुर्जर समाज को जब तक 5 प्रतिशत आरक्षण नहीं मिलेगा, तब तक कर्नल बैसला संघर्ष जारी रखेंगे।
(source : dainik bhaskar)
इस बार होगी आर-पार की लड़ाई
गुर्जर नेता पूर्व विधायक अतर सिंह भडाना ने दी सरकार को चेतावनी
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हिंडौन सिटी. गुर्जर नेता और पूर्व विधायक अतर सिंह भडाना ने आरक्षण के लिए समाज के 74 योद्धाओं द्वारा दिया गया बलिदान व्यर्थ नहीं जाने देने की बात कहते हुए सरकार को चेतावनी दी है कि इस बार गुर्जर आरक्षण के लिए आर-पार की लड़ाई लडेंग़े। इसके लिए 3 सितंबर को नादौती के कैमरी में देश भर के प्रमुख गुर्जर पटेलों और नेताओं की सभा रखी गई है। इसके बाद 5 सितंबर को सिकंदरा के कैलई में महापंचायत आयोजित कर आंदोलन का निर्णय लिया जाएगा।
पूर्व विधायक भडाना गुरूवार को शहर के प्रहलाद कुंड के पास स्थित देवनारायण मंदिर में गुर्जर समाज की बैठक लेकर मीडियाकर्मियों से बात कर रहे थे। भडाना ने बताया कि 3 सितंबर को कैमरी में बैठक रखने के बाद 5 सितंबर को पुन: सिकंदरा के कैलई में प्रदेश भर के गुर्जर समाज के लोगों की महापंचायत आयोजित होगी। इस महापंचायत में कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला, केंद्रीय मंत्री सचिन पायलट को भी बुलाया गया है। भडाना ने बताया कि इस पंचायत में आंदोलन का निर्णय लेकर आरक्षण के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। भडाना ने बताया कि सरकार ने 5 सितंबर तक आरक्षण की मांग पूरी नहीं की तो गुर्जरों का गुस्सा कभी भी फूट सकता है। भडाना ने बताया कि इस बार का आंदोलन एक व्यक्ति और एक स्थान के बजाय पूरे प्रदेश में सामूहिक नेतृत्व में लड़ा जाएगा। इसके लिए सिकंदरा के कैलई में हुई बैठक में 21 लोगों की कमेटी का गठन किया जा चुका है। इस कमेटी में आवश्यकता के अनुसार और भी लोग जोड़े जाएंगे। भडाना ने बताया कि इस बार की लड़ाई में वार्ता की मेज पर किसी भी प्रकार की हार नहीं होगी जिससे आंदोलन में शामिल रहने वाले गुर्जर समाज के लोगों को अन्य आंदोलनों की भांति निराशा का सामना करना पड़े। भडाना ने यह भी कहा कि पूर्व आरक्षण की मांग को लेकर मुख्यमंत्री से मिल चुके हैं और इस संबंध में 5 सितंबर से पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी से भी दिल्ली पहुंचकर मुलाकात की जाएगी। मीडियाकर्मियों से बात करने से पहले भडाना ने देवनारायण मंदिर में गुर्जर समाज के लोगों की बैठक को संबोधित किया। इस बैठक में अध्यक्षता कर रहे पूर्व सरपंच प्रीतम सिंह बैसला सहित पूर्व पार्षद तारा सिंह गुर्जर, देवनारायण मंदिर कमेटी के अध्यक्ष मदन सिंह टीटी, पार्षद कप्तान सिंह गुर्जर, विजेंद्र सिंह कंचन, हरस्वरूप सिंह गुर्जर, पूरन सिंह बडीबाखर, सिर मोहर सिंह सूबेदार, मोहन सिंह बैसला, बनै सिंह गुर्जर आदि लोगों ने भी विचार व्यक्त किए।
सरकार से मिले हुए है बैसला
गुर्जर नेता अतर सिंह भडाना राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को आरक्षण के मुद्दे पर सीधे तौर पर दोषी नहीं बता पाए, बल्कि उन्होंने कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला के खिलाफ जमकर आग उगली। भडाना ने कहा कि अभी तक 14 आंदोलनों के बाद भी गुर्जरों को आरक्षण नहीं मिलने के पीछे कर्नल बैसला हैं। भडाना ने सवाल किया बैसला ने कुशारीपुर दर्रा के आंदोलन को यह कहकर समाप्त किया था कि गुर्जरों को राजेश पायलट की प्रतिमा के अनावरण में जाना है जबकि उस प्रतिमा अनावरण में स्वयं उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद नांगल दुर्गसी में हुई सभा में बैसला मुख्यमंत्री के साथ उपस्थित हो गए। बैसला पर भडाना ने राजनीतिक लाभ के भी आरोप लगाए।
Tuesday, August 21, 2012
‘नेताओं में वर्चस्व की लड़ाई, खमियाजा भुगत रहा है गुर्जर समाज’
अलवर. आरक्षण की मांग को लेकर संघर्ष में कभी भी कमी नहीं रही पर हम वार्ता की टेबल पर हारे। नेताओं में वर्चस्व की लड़ाई रही। इसका खमियाजा समाज को भुगतना पड़ा है। यह बात पूर्व विधायक अतरसिंह भडाना ने सोमवार को यहां सर्किट हाउस में प्रेसवार्ता में कही। उन्होंने कहा कि एसबीसी में चार प्रतिशत और आरक्षण की मांग को लेकर ३ सितंबर को करौली के जगदीश धाम में गुर्जर समाज के पंच पटेलों की बैठक होगी।
इसमें गाडिया लोहार, रैबारी और बंजारा समाज के नेता भी शामिल होंगे। इसमें आगे की रणनीति का फैसला लिया जाएगा। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री सचिन पायलट और कर्नल किरोड़ी बैसला को भी आमंत्रित किया गया है। अब आंदोलन का निर्णय सामूहिक रूप से लिया जाएगा। इसके लिए २१ सदस्यीय संयुक्त संचालन समिति गठित की गई है। इसी क्रम में ५ सितंबर को सिकंदरा के केलाई देवनारायण मंदिर में प्रदेशभर के गुर्जरों की महापंचायत होगी।
पत्रकार वार्ता में राजस्थान पंचायती राज कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष मूलचंद गुर्जर, समाज के नेता वीरेंद्र सिंह, राजेंद्र कसाना आदि भी उपस्थित थे।
इसमें गाडिया लोहार, रैबारी और बंजारा समाज के नेता भी शामिल होंगे। इसमें आगे की रणनीति का फैसला लिया जाएगा। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री सचिन पायलट और कर्नल किरोड़ी बैसला को भी आमंत्रित किया गया है। अब आंदोलन का निर्णय सामूहिक रूप से लिया जाएगा। इसके लिए २१ सदस्यीय संयुक्त संचालन समिति गठित की गई है। इसी क्रम में ५ सितंबर को सिकंदरा के केलाई देवनारायण मंदिर में प्रदेशभर के गुर्जरों की महापंचायत होगी।
पत्रकार वार्ता में राजस्थान पंचायती राज कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष मूलचंद गुर्जर, समाज के नेता वीरेंद्र सिंह, राजेंद्र कसाना आदि भी उपस्थित थे।
Sunday, August 19, 2012
नेहासिंह गुर्जर राजस्थान यूनिवर्सिटी छात्रसंघ की उपाध्यक्ष
जयपुर. राजस्थान यूनिवर्सिटी छात्रसंघ के शनिवार को हुए चुनाव में नेहा सिंह गुर्जर को उपाध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया गया। नेहा सिंह ने एनएसयूआई की ओर से चुनाव लड़ा था। नेहा ने एबीवीपी की नीलम राठौड़ को 1157 मतों से हराया। नेहा सिंह को 4172 मत मिले।
नेहा की बहन आभा भी रह चुकी हैं आर यू की उपाध्यक्ष
नेहा सिंह गुर्जर की बहन आभा सिंह गुर्जर भी राजस्थान यूनिवर्सिटी छात्रसंघ की उपाध्यक्ष रह चुकी हैं। वे पिछले साल हुए चुनाव में जीती थीं। बहन से प्रेरणा लेकर इस बार नेहा ने चुनाव लड़ा और विजयी रही।
- टोंक
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में उपाध्यक्ष पद पर हंसराज गुर्जर विजयी रहे। राजीव गांधी विधि महाविद्यालय में संयुक्त सचिव पद पर सुमन गुर्जर निर्वाचित हुई। - मालपुरा
राजकीय महाविद्यालय में अध्यक्ष पद पर निर्दलीय प्रत्याशी श्रवण गुर्जर विजयी रहे।
- दूनी
- कृष्णा महाविद्यालय में अध्यक्ष पद पर बीए तृतीय वर्ष की छात्रा उगंता गुर्जर विजय रही।
Wednesday, August 08, 2012
गुर्जरों का एक प्रतिशत आरक्षण रखने के आदेश जारी
सरकार ने जारी किया औपचारिक आदेश
जयपुर . विशेष पिछड़ा वर्ग को सरकारी नौकरियों में दिए जा रहे एक प्रतिशत आरक्षण को जारी रखने के औपचारिक के आदेश जारी कर दिए हैं। इस आदेश का प्रभाव हाईकोर्ट की ओर से निस्तारित की गई याचिका की तारीख 22 दिसंबर, 2010 से ही माना जाएगा।
गुर्जरों के साथ हुए समझौते के मुताबिक राज्य सरकार ने 50 प्रतिशत की सीमा के भीतर विशेष पिछड़ा वर्ग में 1 प्रतिशत आरक्षण दिया था। परंतु यह आरक्षण हाईकोर्ट में विचाराधीन याचिका पर फैसला होने तक के लिए दिया गया था। याचिका का निस्तारण होने के बाद इस 1 प्रतिशत आरक्षण पर नए सिरे से निर्णय किया जाना था। हाईकोर्ट से याचिका का फैसला होने के बाद विशेष पिछड़ा वर्ग को दिए जा रहे आरक्षण पर कानूनी रूप से सवाल उठने की आशंका जताई जा रही थी। इसलिए सरकार को औपचारिक आदेश जारी करने पड़े।
गुर्जरों के साथ हुए समझौते के मुताबिक राज्य सरकार ने 50 प्रतिशत की सीमा के भीतर विशेष पिछड़ा वर्ग में 1 प्रतिशत आरक्षण दिया था। परंतु यह आरक्षण हाईकोर्ट में विचाराधीन याचिका पर फैसला होने तक के लिए दिया गया था। याचिका का निस्तारण होने के बाद इस 1 प्रतिशत आरक्षण पर नए सिरे से निर्णय किया जाना था। हाईकोर्ट से याचिका का फैसला होने के बाद विशेष पिछड़ा वर्ग को दिए जा रहे आरक्षण पर कानूनी रूप से सवाल उठने की आशंका जताई जा रही थी। इसलिए सरकार को औपचारिक आदेश जारी करने पड़े।
(source : dainikbhaskar.com)
Sunday, August 05, 2012
पायलट की प्रतिमा क्षतिग्रस्त, गुर्जरों में रोष
कोटपूतली के सरकारी एलबीए कॉलेज में लगी थी प्रतिमा, कॉलेज प्रशासन ने प्रिंसीपल को किया निलंबित, छात्र धरने पर बैठे
कोटपूतली. राजकीय एलबीए कॉलेज में लगी स्व. राजेश पायलटकी प्रतिमा की आंखें व साफे की कलंगी को शनिवार दोपहर किसी ने क्षतग्रस्त कर दिया। घटना का पता चलते ही बड़ी संख्या में गुर्जर समाज के लोग कॉलेज पहुंच गए। वे दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर छात्रों के साथ धरने पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। मामला बढ़ता देख कॉलेज प्रशान ने प्राचार्य को निलंबित कर दिया।
घटना से कॉलेज में माहौल तनावपूर्ण हो गया। समाचार लिखे जाने तक सैकड़ों की तादाद में लोग व पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर डटे हुए थे। एहतियात के तौर पर पुलिस प्रशासन ने शाहपुरा, प्रागपुरा, विराटनगर सहित जयपुर से भी पुलिस बुलाई है।
ये बैठे धरने पर
घटना का पता चलते ही संसदीय सचिव रामस्वरूप कसाना, पूर्व विधायक रामचन्द्र रावत, कांग्रेस के जिला सचिव रामोतार गुर्जर, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सांवत गुर्जर, यूथ कांग्रेस के इन्द्राज गुर्जर, भाजपा के राजाराम कसाना, यूथ कांग्रेस के राजीव कसाना, रामसिंह सीनेटर, रोहिताश कसाना समर्थकों के साथ कॉलेज पहुंचे। दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर वे छात्रों के साथ मूर्ति स्थल पर ही धरने पर बैठ गए। इस दौरान छात्र कॉलेज व पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे
Wednesday, July 11, 2012
देवनारायण योजना के कामों की जिला स्तर पर होगी समीक्षा
दौसा, करौली और सवाई माधोपुर में हो चुकी है, धौलपुर में 12, भरतपुर में 13 और अलवर में 14 जुलाई को होगी
जयपुर. देवनारायण योजना के कार्यों की समीक्षा अब जिला स्तर पर कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला और उनके प्रतिनिधियों की मौजूदगी में होगी। अब तक तीन जिलों दौसा, करौली और सवाई माधोपुर में इन कामों की समीक्षा हो चुकी है। धौलपुर में 12, भरतपुर में 13 और अलवर में 14 जुलाई को समीक्षा होगी।
इधर, मंगलवार को कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला और प्रवक्ता हिम्मतसिंह ने अतिरिक्त मुख्य सचिव अदिति मेहता से मुलाकात की। उन्होंने छात्रवृत्तियों के वितरण और छात्रावासों के कामों की धीमी प्रगति पर असंतोष जाहिर किया। मेहता ने विभागीय अधिकारियों को इस योजना के कामों में तेजी लाने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक में देवनारायण बोर्ड के सचिव डी.पी. गुप्ता और संयुक्त निदेशक डालचंद वर्मा भी मौजूद रहेंगे।
इधर, मंगलवार को कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला और प्रवक्ता हिम्मतसिंह ने अतिरिक्त मुख्य सचिव अदिति मेहता से मुलाकात की। उन्होंने छात्रवृत्तियों के वितरण और छात्रावासों के कामों की धीमी प्रगति पर असंतोष जाहिर किया। मेहता ने विभागीय अधिकारियों को इस योजना के कामों में तेजी लाने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक में देवनारायण बोर्ड के सचिव डी.पी. गुप्ता और संयुक्त निदेशक डालचंद वर्मा भी मौजूद रहेंगे।
Thursday, July 05, 2012
महापंचायत में नहीं आएंगे बैसला
दौसा. गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश प्रवक्ता हिम्मतसिंह पाड़ली ने कहा कि कैलाई में आयोजित होने वाली महापंचायत समाज को गुमराह करने के लिए है। बुधवार को प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि महापंचायत कराने वाले लोग राजनीतिक पार्टियों से जुड़े हुए हैं तथा भाजपा सरकार में मंत्री व विधायक रह चुके हैं। उस समय सरकार गुर्जरों पर गोलियां बरसा रही थी तथा वे सत्ता सुख भोग रहे थे। उन्होंने कहा कि कर्नल बैसला के आंदोलन के बाद राजस्थान में एसबीसी कैटेगरी बन गई है। गुर्जरों को आरक्षण मिल चुका है। इसमें प्रतिशत बढ़वाने की बात है। महापंचायत में कर्नल बैसला के आने की बात कह रहे हैं, जबकि बैसला देवनारायण योजना की क्रियान्विति की समीक्षा बैठकों में व्यस्त हैं। बैसला कैलाई में होने वाली महापंचायत में भाग नहीं लेंगे।
source: dainik bhaskar
source: dainik bhaskar
Wednesday, July 04, 2012
अब सामूहिक नेतृत्व में होगा आरक्षण आंदोलन
दौसा . पूर्व विधायक अतर सिंह भडाना ने कहा है कि गुर्जर आरक्षण आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के बजाय अब सामूहिक नेतृत्व में ही चलाया जाएगा। इस संबंध में 5 जुलाई को सिकंदरा के पास कैलाई भोजपुरा में गुर्जर महापंचायत का आयोजन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आरक्षण के लिए गुर्जर समाज ने आंदोलन किए और किरोड़ी सिंह बैसला ने समझौते, लेकिन परिणाम कुछ भी नहीं निकला। भडाना ने कहा कि समझौतों के बजाय सौदे किए जा रहे हैं। वह मंगलवार को यहां पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। भडाना ने कहा कि अतीत की समीक्षा व भविष्य की रणनीति तय करने के लिए गुरुवार को महापंचायत का आयोजन किया जा रहा है। आरक्षण आंदोलन में योगदान देने वाले सभी लोग व समाज के पंच पटेल इस महापंचायत में भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि अब तक आंदोलन, समझौते व फैसले करने में कोई कसर नहीं रही। लेकिन मौत और बदनामी के सिवा समाज को कुछ नहीं मिला। राजस्थान गुर्जर महासभा के जिलाध्यक्ष कंवरपाल अंदाना ने कहा कि कर्नल बैसला भी महापंचायत में भाग लेंगे। इस संबंध में कर्नल से फोन पर बात हुई है।
source: dainik bhaskar
उन्होंने कहा कि आरक्षण के लिए गुर्जर समाज ने आंदोलन किए और किरोड़ी सिंह बैसला ने समझौते, लेकिन परिणाम कुछ भी नहीं निकला। भडाना ने कहा कि समझौतों के बजाय सौदे किए जा रहे हैं। वह मंगलवार को यहां पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। भडाना ने कहा कि अतीत की समीक्षा व भविष्य की रणनीति तय करने के लिए गुरुवार को महापंचायत का आयोजन किया जा रहा है। आरक्षण आंदोलन में योगदान देने वाले सभी लोग व समाज के पंच पटेल इस महापंचायत में भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि अब तक आंदोलन, समझौते व फैसले करने में कोई कसर नहीं रही। लेकिन मौत और बदनामी के सिवा समाज को कुछ नहीं मिला। राजस्थान गुर्जर महासभा के जिलाध्यक्ष कंवरपाल अंदाना ने कहा कि कर्नल बैसला भी महापंचायत में भाग लेंगे। इस संबंध में कर्नल से फोन पर बात हुई है।
source: dainik bhaskar
समाज की एकता के लिए बुलाई महापंचायत : कसाना
सिकंदरा . भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष व गुर्जर महासभा के महामंत्री अमरसिंह कसाना ने कहा कि 5 जुलाई को कैलाई के देवनारायण मंदिर पर बुलाई गई महापंचायत समाज की एकता के लिए बुलाई गई है।
कसाना ने मंगलवार को बताया कि प्रदेश के दौरे के समय समाज के लोगों द्वारा नेताओं को एक मंच पर बैठाकर आरक्षण आंदोलन की रणनीति बनाने की बात कही थी। इसे लेकर सभी राजनैतिक दलों के समाज के नेताओं को एक मंच पर लाने के लिए यह महापंचायत बुलाई गई तथा समाज के सभी नेताओं को इसमें आमंत्रित किया गया है। उन्होंने बताया कि महापंचायत में समाज की एकता सहित आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा की जाएगी।
कसाना ने मंगलवार को बताया कि प्रदेश के दौरे के समय समाज के लोगों द्वारा नेताओं को एक मंच पर बैठाकर आरक्षण आंदोलन की रणनीति बनाने की बात कही थी। इसे लेकर सभी राजनैतिक दलों के समाज के नेताओं को एक मंच पर लाने के लिए यह महापंचायत बुलाई गई तथा समाज के सभी नेताओं को इसमें आमंत्रित किया गया है। उन्होंने बताया कि महापंचायत में समाज की एकता सहित आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा की जाएगी।
Tuesday, July 03, 2012
सिकंदरा महापंचायत के विरोध में गुर्जर महासभा
आंदोलन को भटकाने की कोशिश बताया
जयपुर. सिकंदरा के पास ५ जुलाई को प्रस्तावित गुर्जर महापंचायत को अखिल भारतीय गुर्जर महासभा ने समाज के आरक्षण आंदोलन को भटकाने की मशक्कत करार दिया।अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय महासचिव बच्चू सिंह बैसला और कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष रामप्रसाद धाभाई ने सोमवार को यहां मीडिया को बताया कि महापंचायत का गुर्जर महासभा से कोई लेना-देना नहीं। जो लोग यह महापंचायत कर रहे हैं, उन्हें गुर्जर समाज से कोई सरोकार नहीं। इन लोगों का राजस्थान के गुर्जर समाज से कोई लेना-देना नहीं और न इनका यहां आधार है। ये लोग अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने और मात्र एमएलए बनने का ख्वाब पूरा करने के लिए महापंचायत जैसे आयोजन कर रहे हैं। महासभा समाज के लोगों से अपील करती है कि वे किसी प्रकार की विध्वंसकारी गतिविधि में शामिल नहीं हों।
उन्होंने कहा कि गुर्जर महासभा की मूल मांग आज भी गुर्जरों को एसटी में आरक्षण देने की है। कुछ निहित स्वार्थी तत्वों ने समाज के आरक्षण आंदोलन को भटका दिया और समाज के ७२ बेटों का बलिदान करा दिया। आंदोलन को आंकड़ों में उलझा दिया। राज्य सरकार आरक्षण के नाम पर समय-समय पर जो भी दे रही है, गुर्जर महासभा उसे अंतरिम राहत के तौर पर स्वीकार करेगी। महासभा अहिंसात्मक तरीके से गुर्जर आरक्षण का आंदोलन जारी रखेगी।
गुर्जर आरक्षण : सिकंदरा के पास 5 को बुलाई महापंचायत
गुर्जर नेता अतरसिंह भडाना और नाथूसिंह गुर्जर करेंगे महापंचायत की अगुवाई, गुर्जर आंदोलनों में नेतृत्व की भूमिका पर उठाए सवाल
जयपुर. गुर्जर आरक्षण के मुद्दे पर कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला के नेतृत्व को चुनौती देते हुए एक धड़े ने 5 जुलाई को सिकंदरा के पास कैलाई भोजपुरा में महापंचायत बुलाई है। गुर्जर नेता अतर सिंह भडाना ने शनिवार को मीडिया से कहा कि महापंचायत में समाज के सभी लोग बुलाए हैं। गुर्जर समाज की आरक्षण की लड़ाई में नेतृत्व के स्तर पर कमियां रहीं, जिसकी वजह से समाज के 72 बेटों के बलिदान के बावजूद उसका हक नहीं मिल पाया। आरक्षण की मांग पर इतने आंदोलन हुए लेकिन नेतृत्व स्तर पर कुछ कमियां रहीं, जिनकी वजह से समाज आज भी वहीं है, जिस मांग को लेकर वह चला था।
उन्होंने कहा कि गुर्जर समाज ने आरक्षण आंदोलन को लेकर पांच साल में क्या खोया-क्या पाया, इस पर महापंचायत में विचार होगा और रणनीति तय होगी। इसमें लिया गया फैसला सामूहिक नेतृत्व का होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने गुर्जरों और अन्य चार जातियों को 1 प्रतिशत आरक्षण एसबीसी में दिया है। सरकार से मांग है कि वह ओबीसी में से इन जातियों की जनसंख्या के आधार पर वर्गीकरण कर जितना प्रतिशत आरक्षण जनसंख्या के आधार पर आता है वह दिया जाए।
उन्होंने कहा कि गुर्जर समाज ने आरक्षण आंदोलन को लेकर पांच साल में क्या खोया-क्या पाया, इस पर महापंचायत में विचार होगा और रणनीति तय होगी। इसमें लिया गया फैसला सामूहिक नेतृत्व का होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने गुर्जरों और अन्य चार जातियों को 1 प्रतिशत आरक्षण एसबीसी में दिया है। सरकार से मांग है कि वह ओबीसी में से इन जातियों की जनसंख्या के आधार पर वर्गीकरण कर जितना प्रतिशत आरक्षण जनसंख्या के आधार पर आता है वह दिया जाए।
चुनाव तक आरक्षण को टालना चाहती है सरकार : नाथू सिंह
पूर्व मंत्री नाथूसिंह गुर्जर ने कहा कि गुर्जरों को एसबीसी में पांच प्रतिशत आरक्षण देने में सरकार की मंशा साफ नहीं है। हाई कोर्ट ने सरकार को चार माह में सर्वे करवाकर क्वांटिफाइड डाटा भेजने के आदेश दिए थे। सरकार के खिलाफ हाई कोर्ट की अवमानना का मामला बनता है। हम हाईकोर्ट जाएंगे। हाईकोर्ट ने सरकार को चार माह का समय दिया था, सरकार ने ओबीसी आयोग ही अभी बनाया है। इसका मतलब है कि सरकार की मंशा साफ नहीं है और वह गुर्जर आरक्षण के मामले को चुनाव तक लटकाना चाहती है। यह तय है कि सरकार आरक्षण नहीं देगी, अगले चुनाव तक ।
आरक्षण को लेकर भाजपा ने गुर्जरों से कोई वादा नहीं किया था
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा भाजपा ने गुर्जरों को आरक्षण देने का कोई वादा नहीं किया था। परिवर्तन यात्रा के दौरान पिछली बार लोगों ने मांग उठाई थी तब हमने कहा था कि सरकार बनने पर देखा जाएगा कि इस मामले में क्या किया जा सकता है। गुर्जरों को एसटी में आरक्षण देने की हमारी की मांग जारी है, यह केंद्र का विषय है।
गहलोत तब तक सोचते हैं जब तक बात बासी न हो जाए
खुलकर बोले किरोड़ी सिंह बैसला
गहलोत कुशल प्रशासक, चापलूसों से घिरी रहती हैं वसुंधरा
सबकी एक नीति है-डिले, डिफ्यूज और डिनायल
त्रिभुवन . जयपुर
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत काम तो करते हैं, लेकिन इतना विलंब से कि सब बदमजा (बासी) हो जाता है। हालांकि वे कुशल प्रशासक हैं। वसुंधरा राजे बेईमान सलाहकारों और चापलूसों से नहीं घिरी होतीं तो वे रेयरेस्ट रेयर मुख्यमंत्री होतीं। ये कहना है गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बैसला का। बैसला ने कहा कि वे सिर्फ पांच प्रतिशत आरक्षण चाहते हैं, चाहे कैसे भी दो। पेश हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश-
आपने गहलोत और वसुंधरा राजे दोनों की सरकारों के समय आंदोलन किया। बुनियादी फर्क क्या नजर आया?
क्च दोनों सरकारों की एक टिपिकल मोडस आपरेंडी रही है। डिले, डिफ्यूज और डिनायल। देर करो, लटकाओ और हाथ खड़े कर दो। अगर अशोक गहलोत ने वही किया जो हमारे साथ वसुंधरा ने किया तो इस आदमी को भी वहीं जाना होगा, जहां वसुंधरा गईं।
वसुंधरा राजे ने आपकी मांग मानी होती तो क्या होता?
क्च वसुंधरा राजे ने मेरा कहा माना होता तो वे आज कहीं और होतीं, वहां नहीं होतीं जहां आज हैं। उन्होंने हमें अंडर एस्टीमेट किया। जब चुनाव आए तो हमने उन्हें वही सब उसी तरह वैसे का वैसे लौटाया, जो उन्होंने गुर्जर समाज को आंदोलन के दौरान दिया था। उन्होंने हमारे साथ लुका-छिपी का खेल खेला। हमने भी वही किया। नतीजा सबके सामने है।
अगर वसुंधरा इतनी खराब हैं तो आपने भाजपा के टिकट पर चुनाव क्यों लड़ा?
क्च ये मेरा पर्सनेलिटी कल्ट है। मैं जेंटलमैन की तरह बिहेव करता हूं। अगर चुनाव लड़ा तो मकसद यही था कि संसद में आवाज उठाऊं। मेरा वो निर्णय गलत नहीं था।
आपने कभी वसुंधरा से कहा नहीं कि वे गलत सलाहकारों से घिरी हैं?
क्च 2008 की बात है। मैं पीलूपुरा से लौटकर वसुंधरा राजे से मिला। वे अपने ऑफिस में थीं। भिड़ते ही बोलीं : कर्नल, हम दोनों में गैप कहां रह गया? मैंने जवाब दिया : यू आर ब्लू-ब्लड पीपल। आप शाही लोग हैं। आप हर वक्त चापलूसों से घिरी रहती हैं। आपने तो मेरा फोन तक अटेंड नहीं किया। आपके सलाहकारों ने मेरी पूरी गलत तस्वीर आपको दिखाई और इस ग्रॉस मिस अंडरस्टैंडिंग ने सही फैसला नहीं होने दिया।
अब फिर आपकी मांग नहीं मानी जा रही। आप क्या कहते हैं?
क्च ये आदमी (अशोक गहलोत) सोचता बहुत अच्छा है, लेकिन सोचता ही सोचता रहता है। किसी चीज को करने में इतना टाइम लगाता है कि जब तक चीज बासी नहीं हो जाती। मैं जूलियर सीजर पढ़ रहा था। उसमें सीजर अपने बेटे से कहता है कि कुछ काम करो तो जोरदार आवाज में कहो ताकि अड़ोसी-पड़ोसी सुन लें।
क्या ओबीसी कमीशन को ऐसी जातियों को बाहर नहीं निकालना चाहिए, जो संपन्न हो गई?
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत काम तो करते हैं, लेकिन इतना विलंब से कि सब बदमजा (बासी) हो जाता है। हालांकि वे कुशल प्रशासक हैं। वसुंधरा राजे बेईमान सलाहकारों और चापलूसों से नहीं घिरी होतीं तो वे रेयरेस्ट रेयर मुख्यमंत्री होतीं। ये कहना है गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बैसला का। बैसला ने कहा कि वे सिर्फ पांच प्रतिशत आरक्षण चाहते हैं, चाहे कैसे भी दो। पेश हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश-
आपने गहलोत और वसुंधरा राजे दोनों की सरकारों के समय आंदोलन किया। बुनियादी फर्क क्या नजर आया?
क्च दोनों सरकारों की एक टिपिकल मोडस आपरेंडी रही है। डिले, डिफ्यूज और डिनायल। देर करो, लटकाओ और हाथ खड़े कर दो। अगर अशोक गहलोत ने वही किया जो हमारे साथ वसुंधरा ने किया तो इस आदमी को भी वहीं जाना होगा, जहां वसुंधरा गईं।
वसुंधरा राजे ने आपकी मांग मानी होती तो क्या होता?
क्च वसुंधरा राजे ने मेरा कहा माना होता तो वे आज कहीं और होतीं, वहां नहीं होतीं जहां आज हैं। उन्होंने हमें अंडर एस्टीमेट किया। जब चुनाव आए तो हमने उन्हें वही सब उसी तरह वैसे का वैसे लौटाया, जो उन्होंने गुर्जर समाज को आंदोलन के दौरान दिया था। उन्होंने हमारे साथ लुका-छिपी का खेल खेला। हमने भी वही किया। नतीजा सबके सामने है।
अगर वसुंधरा इतनी खराब हैं तो आपने भाजपा के टिकट पर चुनाव क्यों लड़ा?
क्च ये मेरा पर्सनेलिटी कल्ट है। मैं जेंटलमैन की तरह बिहेव करता हूं। अगर चुनाव लड़ा तो मकसद यही था कि संसद में आवाज उठाऊं। मेरा वो निर्णय गलत नहीं था।
आपने कभी वसुंधरा से कहा नहीं कि वे गलत सलाहकारों से घिरी हैं?
क्च 2008 की बात है। मैं पीलूपुरा से लौटकर वसुंधरा राजे से मिला। वे अपने ऑफिस में थीं। भिड़ते ही बोलीं : कर्नल, हम दोनों में गैप कहां रह गया? मैंने जवाब दिया : यू आर ब्लू-ब्लड पीपल। आप शाही लोग हैं। आप हर वक्त चापलूसों से घिरी रहती हैं। आपने तो मेरा फोन तक अटेंड नहीं किया। आपके सलाहकारों ने मेरी पूरी गलत तस्वीर आपको दिखाई और इस ग्रॉस मिस अंडरस्टैंडिंग ने सही फैसला नहीं होने दिया।
अब फिर आपकी मांग नहीं मानी जा रही। आप क्या कहते हैं?
क्च ये आदमी (अशोक गहलोत) सोचता बहुत अच्छा है, लेकिन सोचता ही सोचता रहता है। किसी चीज को करने में इतना टाइम लगाता है कि जब तक चीज बासी नहीं हो जाती। मैं जूलियर सीजर पढ़ रहा था। उसमें सीजर अपने बेटे से कहता है कि कुछ काम करो तो जोरदार आवाज में कहो ताकि अड़ोसी-पड़ोसी सुन लें।
क्या ओबीसी कमीशन को ऐसी जातियों को बाहर नहीं निकालना चाहिए, जो संपन्न हो गई?
ये ओबीसी कमीशन का काम है। उसे इस काम को ईमानदारी से करना चाहिए। मैं ये नहीं कहता कि इस या उस जाति को निकाल दो। कुछ को तो आरक्षण की खाते-खाते अपच हो गई और कुछ ने अभी तक पत्तल ही नहीं देखी। समाज आज जातियुद्ध की तरफ बढ़ रहा है।
माना तो ये जा रहा है कि आप तो गहलोत के प्रशंसक हैं?
क्च एक मायने में गहलोत कुशल प्रशासक हैं। वे वेल्फेयर ओरिएंटिड हैं। उन्होंने एक प्रतिशत आरक्षण निर्विवाद रूप से दे ही दिया।
क्या आप ओबीसी के 21 प्रतिशत में ही पांच प्रतिशत चाहते हैं?
माना तो ये जा रहा है कि आप तो गहलोत के प्रशंसक हैं?
क्च एक मायने में गहलोत कुशल प्रशासक हैं। वे वेल्फेयर ओरिएंटिड हैं। उन्होंने एक प्रतिशत आरक्षण निर्विवाद रूप से दे ही दिया।
क्या आप ओबीसी के 21 प्रतिशत में ही पांच प्रतिशत चाहते हैं?
मैं इस पचड़े में नहीं पड़ता। हमने आरक्षण की मांग इसलिए की थी कि आरपीएससी-यूपीएससी के रिजल्ट देख लो। कुछ लोग सारे कोटे को खा रहे हैं और कुछ ताक रहे हैं। ऐसा है जैसे मानवीयता का अकाल पड़ गया है। क्या ऐसा आरक्षण संवैधानिक डकैती नहीं है? इसलिए हमें तो पांच प्रतिशत आरक्षण अलग से दे दो। चाहे कैसे भी।
ओबीसी आयोग के अध्यक्ष इसरानी ने कहा है कि वे रिपोर्ट चेक करेंगे। जरूरत पड़ी तो दुबारा जांच करेंगे कि हालात क्या हैं?
ओबीसी आयोग के अध्यक्ष इसरानी ने कहा है कि वे रिपोर्ट चेक करेंगे। जरूरत पड़ी तो दुबारा जांच करेंगे कि हालात क्या हैं?
मैं तो जस्टिस इसरानी से कहता हूं, हमारे सब नेताओं को चैलेंज करता हूं, ये एक रात गाडिया लुहारों के घरों में एक गुजार लें और सही-सलामत उठ जाएं तो मैं जीवन में कभी आरक्षण की मांग नहीं करूंगा! गुर्जरों, बंजारों, राइकों और लुहारों के हालात एक जैसे हैं। मैं इनके बीच रहता हूं, मैं जानता हूं।
इस सरकार ने भी आरक्षण नहीं दिया तो क्या करेंगे?
क्च सभी कान खोलकर सुन लें, जो हमारी देखभाल करेगा, हम उसकी देखभाल करेंगे। लेकिन अगला चुनाव बहुत निर्णायक होगा। उसमें बहुत कुछ निर्णायक होगा।
वसुंधरा राजे और अशोक गहलोत में क्या मूल फर्क देखा?
वो बड़ी तेजतर्रार (अस्टूट) हैं और ये जेंटलमैन। आप अगर दूध से भरा गिलास रख देंगे तो ये जेंटलमैन घूंट तब भरेगा जब तक बिल्ली को न पिला ले! और अगर वसुंधरा के सलाहकार सही होते तो बात कुछ और होती। वसुंधरा अगर अपने मन से फैसले लें तो मेरा मानना है, वे रेयरेस्ट रेयर रूलर हैं।
मुख्यमंत्री से आपकी नजदीकियां बढ़ी हैं। माना जा रहा है कि आप इस बार कांग्रेस से चुनाव लड़ेंगे?
अभी तो कोई इरादा नहीं। लेकिन ये कह सकता हूं कि मैंने अपने ही समाज नहीं, अन्य समाजों में भी अच्छा स्थान बनाया है। मैं सामाजिक न्याय को दुरुस्त करने के लिए लडूंगा।
इस सरकार ने भी आरक्षण नहीं दिया तो क्या करेंगे?
क्च सभी कान खोलकर सुन लें, जो हमारी देखभाल करेगा, हम उसकी देखभाल करेंगे। लेकिन अगला चुनाव बहुत निर्णायक होगा। उसमें बहुत कुछ निर्णायक होगा।
वसुंधरा राजे और अशोक गहलोत में क्या मूल फर्क देखा?
वो बड़ी तेजतर्रार (अस्टूट) हैं और ये जेंटलमैन। आप अगर दूध से भरा गिलास रख देंगे तो ये जेंटलमैन घूंट तब भरेगा जब तक बिल्ली को न पिला ले! और अगर वसुंधरा के सलाहकार सही होते तो बात कुछ और होती। वसुंधरा अगर अपने मन से फैसले लें तो मेरा मानना है, वे रेयरेस्ट रेयर रूलर हैं।
मुख्यमंत्री से आपकी नजदीकियां बढ़ी हैं। माना जा रहा है कि आप इस बार कांग्रेस से चुनाव लड़ेंगे?
अभी तो कोई इरादा नहीं। लेकिन ये कह सकता हूं कि मैंने अपने ही समाज नहीं, अन्य समाजों में भी अच्छा स्थान बनाया है। मैं सामाजिक न्याय को दुरुस्त करने के लिए लडूंगा।
(source: dainikbhaskar)
Thursday, June 28, 2012
अब गुर्जरों को दो जाति प्रमाण
जयपुर. गुर्जरों समेत विशेष पिछड़ा वर्ग में शामिल पांच जातियों के युवाओं
को अब दो जाति प्रमाण पत्र मिलेंगे। इनमें एक अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और
दूसरा विशेष पिछड़ा वर्ग (एसबीसी) का होगा। इसके लिए कार्मिक विभाग फॉर्मेट
तैयार करेगा। कलेक्टरों और तहसीलदारों को दो प्रमाण-पत्र जारी करने के
निर्देश दिए जा चुके हैं।
इन जातियों को केन्द्र सरकार की नौकरियों में आ रही परेशानी को देखते हुए राज्य सरकार ने यह फैसला किया है। गुर्जरों के साथ हुई बैठक के फैसलों की क्रियान्विति की समीक्षा बैठक के बाद मुख्य सचिव सी. के. मैथ्यू ने भास्कर को बताया कि २ प्रमाण पत्रों के संबंध में सैद्धांतिक फैसला कर लिया गया है। कार्मिक विभाग को इन प्रमाण-पत्रों का फॉर्मेट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्मिक विभाग जल्दी ही यह फॉर्मेट जिला कलेक्टरों को भिजवाएगा। गुर्जरों की अन्य मांगों छात्रवृत्ति, मुकदमों, देवनारायण योजना के पैकेज में होने वाले कामों के संबंध में संबंधित विभागों ने अब तक हुई प्रगति के बारे में जानकारी दी।
इन जातियों को केन्द्र सरकार की नौकरियों में आ रही परेशानी को देखते हुए राज्य सरकार ने यह फैसला किया है। गुर्जरों के साथ हुई बैठक के फैसलों की क्रियान्विति की समीक्षा बैठक के बाद मुख्य सचिव सी. के. मैथ्यू ने भास्कर को बताया कि २ प्रमाण पत्रों के संबंध में सैद्धांतिक फैसला कर लिया गया है। कार्मिक विभाग को इन प्रमाण-पत्रों का फॉर्मेट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्मिक विभाग जल्दी ही यह फॉर्मेट जिला कलेक्टरों को भिजवाएगा। गुर्जरों की अन्य मांगों छात्रवृत्ति, मुकदमों, देवनारायण योजना के पैकेज में होने वाले कामों के संबंध में संबंधित विभागों ने अब तक हुई प्रगति के बारे में जानकारी दी।
गुर्जर युवाओं को हो रहा था नुकसान
कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला और उनके साथियों के साथ हुई बैठक में यह बिंदु
उभरा था कि ज्यादातर युवाओं को केन्द्र सरकार की नौकरियों से वंचित होना
पड़ा रहा है। इसकी वजह है कि केन्द्र सरकार में विशेष पिछड़ा वर्ग (एसबीसी)
नाम से कोई कैटेगरी ही नहीं है। वहां केवल अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की ही
कैटेगरी है। राज्य में एसबीसी का लाभ तभी मिलता है जब एसबीसी का
प्रमाण-पत्र हो। जिलों में तहसीलदार केवल एक ही जाति प्रमाण-पत्र जारी करते
हैं। गुर्जर प्रतिनिधियों ने इस समस्या के समाधान के लिए दो प्रमाण-पत्र
जारी करने की मांग रखी थी।
शिक्षा में आरक्षण अभी नहीं
बैठक में यह बिंदु भी आया कि गुर्जर शैक्षणिक संस्थानों में 5 प्रतिशत आरक्षण तुरंत लागू करने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क यह है कि शैक्षणिक संस्थानों में चूंकि प्रवेश प्रक्रिया हर साल पूरी हो जाती है, इसलिए वहां बैकलॉग नहीं रह सकता। इस पर अधिकारियों ने मुख्य सचिव को बताया कि वर्ष 2008 में पारित एक्ट की धारा 3 में शैक्षणिक संस्थानों में 5 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने का प्रावधान था। हाईकोर्ट ने धारा 3 को लागू करने पर भी स्थगन आदेश दे रखा है, इसलिए शैक्षणिक संस्थाओं में फिलहाल आरक्षण नहीं दिया जा सकता।
(source: dainik bhaskar)
Monday, June 18, 2012
आरक्षण दिला कर रहूंगा : बैसला
बमोर में हुई गोठ क्षेत्र के 20 गांवों की गुर्जर समाज की महापंचायत
मेहंदवास (टोंक). बमोर गांव में रविवार को गुर्जर समाज की महापंचायत हुई। आसपास के गांवों से आई भारी भीड़ के बीच कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला ने लोगों को भरोसा दिलाया कि मैं जीते जी समाज को आरक्षण दिलवाकर रहूंगा। इसके लिए चाहे मुझे कोई भी कीमत चुकानी पड़े।
गोठ क्षेत्र के 20 गांवों की सोमवार को हुई महापंचायत के मुख्य अतिथि गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला ने दोहराया कि जब तक समाज को आरक्षण नहीं मिलेगा वे चैन से नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार 65 लाख गुर्जरों को उनके हक से वंचित नहीं रख सकती। बैसला ने गुर्जर सरदारों को विश्वास दिलाया कि वे निश्चित रहे उनकी हक की लड़ाई जारी रहेगी। बीच-बीच में कर्नल तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ है, के नारों बीच कर्नल ने कहा कि संविधान हमारे लिए है, हम संविधान के लिए नहीं। इस पहले पूर्व पूर्व सरपंच रामस्वरूप गुर्जर सहित स्थानीय समाज के लोगों ने लादूलाल तालिबपुरा, रामप्रकाश झालरा, कुलदीप अंबालाल, सुखदेव, गोपी, उपप्रधान देवलाल गुर्जर का साफा बंधा कर व माल्यार्पण कर स्वागत किया।
इस अवसर पर खंडार प्रधान गिर्राज गुर्जर ने कहा शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि बिना डंडे के आरक्षण नहीं मिलने वाला। खरेड़ा सरपंच रामचंद्र गुर्जर ने कहा कि आरक्षण मिलते समाज की दशा व दिशा अपने आप बदल जाएगी। देवली के पूर्व प्रधान व गुर्जर नेता उदयलाल ने कहा कि कुरीतियां त्यागने व नशे से दूर रहने पर जोर दिया। गुर्जर महासभा के पूर्व जिलाध्यक्ष राजेंद्र गुर्जर ने सामाजिक बुराइयां मिटाने, टोंक कृषि चेयरमेन सुमन गुर्जर ने समाज के हित के लिए इस्तीफा तक देने की बात कही। महासभा के ब्लॉक अध्यक्ष रामलाल संडीला, भूमि विकास बैंक के चेयरमेन गणेश गुर्जर, मालपुरा के पूर्व प्रधान छोगालाल गुर्जर, राजेंद्र बोकण, जगदीश महुआ, बहादुर सिंह निमोद, जगदीश लोहरवाड़ा, हरिराम गुर्जर आदि ने भी सभा को संबोधित किया।
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