Monday, February 22, 2010

गुर्जर आर्य हैं, वतन परस्ती में हमेशा रहे आगे

गुर्जर हिस्ट्री कॉन्फ्रेंस संपन्न, गुर्जर आरक्षण आंदोलन में गुर्जरों पर लगे मुकदमे वापस लेने, केन्द्र द्वारा प्रस्तावित अनुसूचित जनजाति नीति 2006 लागू करने, देवनारायण विकास बोर्ड का गठन करने सहित अन्य प्रस्ताव पारित
जयपुर. राजस्थान गुर्जर महासभा, भारतीय गुर्जर परिषद और देवनारायण धर्मार्थ जनकल्याण ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में कालवाड़ रोड स्थित गोमती भवन में दो दिवसीय गुर्जर हिस्ट्री कॉन्फ्रेंस रविवार को संपन्न हुई। इतिहासकार डॉ.दयाराम वर्मा ने कहा कि गुर्जर आर्य हैं और वतन परस्ती में हमेशा आगे रहे हैं। वर्तमान में गुर्जर भारत और थाईलैंड में निवास करते हैं। उन्होंने बताया कि 1857 की क्रांति में जितनी कुर्बानी गुर्जरों ने दी, और किसी ने नहीं दी। मेरठ में कोतवाल धनसिंह ने 10 मई 1857 को क्रांति का सूत्रपात किया था। डॉ. नीलम जिवानी ने गुर्जरों को कर्मशीलता, व्यवहार कुशलता और ईमानदारी में सबसे आगे बताया। इनके अलावा 10 से ज्यादा इतिहासकारों ने गुर्जर इतिहास की व्याख्या की और इससे प्रेरणा लेकर भविष्य का गुर्जर समाज बनाने का आह्वान किया। राजस्थान गुर्जर महासभा के प्रदेश अध्यक्ष रामगोपाल गार्ड की अध्यक्षता में गुर्जर आरक्षण आंदोलन में गुर्जरों पर लगे मुकदमे वापस लेने, केन्द्र द्वारा प्रस्तावित अनुसूचित जनजाति नीति 2006 लागू करने, देवनारायण विकास बोर्ड का गठन करने सहित अन्य प्रस्ताव पारित किए गए।

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