अब गुर्जरों को दो जाति प्रमाण

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जयपुर. गुर्जरों समेत विशेष पिछड़ा वर्ग में शामिल पांच जातियों के युवाओं को अब दो जाति प्रमाण पत्र मिलेंगे। इनमें एक अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और दूसरा विशेष पिछड़ा वर्ग (एसबीसी) का होगा। इसके लिए कार्मिक विभाग फॉर्मेट तैयार करेगा। कलेक्टरों और तहसीलदारों को दो प्रमाण-पत्र जारी करने के निर्देश दिए जा चुके हैं।

इन जातियों को केन्द्र सरकार की नौकरियों में आ रही परेशानी को देखते हुए राज्य सरकार ने यह फैसला किया है। गुर्जरों के साथ हुई बैठक के फैसलों की क्रियान्विति की समीक्षा बैठक के बाद मुख्य सचिव सी. के. मैथ्यू ने भास्कर को बताया कि २ प्रमाण पत्रों के संबंध में सैद्धांतिक फैसला कर लिया गया है। कार्मिक विभाग को इन प्रमाण-पत्रों का फॉर्मेट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्मिक विभाग जल्दी ही यह फॉर्मेट जिला कलेक्टरों को भिजवाएगा। गुर्जरों की अन्य मांगों छात्रवृत्ति, मुकदमों, देवनारायण योजना के पैकेज में होने वाले कामों के संबंध में संबंधित विभागों ने अब तक हुई प्रगति के बारे में जानकारी दी।

गुर्जर युवाओं को हो रहा था नुकसान

कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला और उनके साथियों के साथ हुई बैठक में यह बिंदु उभरा था कि ज्यादातर युवाओं को केन्द्र सरकार की नौकरियों से वंचित होना पड़ा रहा है। इसकी वजह है कि केन्द्र सरकार में विशेष पिछड़ा वर्ग (एसबीसी) नाम से कोई कैटेगरी ही नहीं है। वहां केवल अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की ही कैटेगरी है। राज्य में एसबीसी का लाभ तभी मिलता है जब एसबीसी का प्रमाण-पत्र हो। जिलों में तहसीलदार केवल एक ही जाति प्रमाण-पत्र जारी करते हैं। गुर्जर प्रतिनिधियों ने इस समस्या के समाधान के लिए दो प्रमाण-पत्र जारी करने की मांग रखी थी।

शिक्षा में आरक्षण अभी नहीं

बैठक में यह बिंदु भी आया कि गुर्जर शैक्षणिक संस्थानों में 5 प्रतिशत आरक्षण तुरंत लागू करने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क यह है कि शैक्षणिक संस्थानों में चूंकि प्रवेश प्रक्रिया हर साल पूरी हो जाती है, इसलिए वहां बैकलॉग नहीं रह सकता। इस पर अधिकारियों ने मुख्य सचिव को बताया कि वर्ष 2008 में पारित एक्ट की धारा 3 में शैक्षणिक संस्थानों में 5 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने का प्रावधान था। हाईकोर्ट ने धारा 3 को लागू करने पर भी स्थगन आदेश दे रखा है, इसलिए शैक्षणिक संस्थाओं में फिलहाल आरक्षण नहीं दिया जा सकता। 
 (source: dainik bhaskar)

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