हम पिछड़े हैं, क्योंकि अपने बच्चों को नहीं पढ़ाते

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बड़ा गांव खेड़ला में राजस्थान गुर्जर महासभा की ओर से आयोजित गुर्जर सम्मेलन में वक्ताओं ने दिया समाज में शिक्षा के प्रसार पर जोर


महवा (दौसा जिला). हमारे लोग शिक्षा के प्रति जागरूक नहीं हैं, इसीलिए हम पिछड़े है और हमारे समाज में कई कुरीतियों व्याप्त हैं। जब तक हम शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत नहीं होंगे केवल आरक्षण मिलने से ही हमारा भला नहीं होगा। हमें अपने बेटों को ही नहीं बेटियों को भी पढ़ाना होगा, तभी हम वक्त के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकेंगे। यह कहना था बड़ा गांव खेड़ला में राजस्थान गुर्जर महासभा की ओर से आयोजित गुर्जर सम्मेलन में आए वक्ताओं का। बाद में वक्ताओं ने पांडाल में मौजूद समाज के लोगों को अपने बच्चों को पढ़ाने की शपथ दिलाई।

एक और आंदोलन की जरूरत : कालू लाल गुर्जर

मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री कालूलाल गुर्जर ने कहा कि आरक्षण आंदोलन में दर्जनों कुर्बानियों के बावजूद आरक्षण के नाम पर समाज को कुछ भी हासिल नहीं हुआ। इतने बड़े और इतने आंदोलनों के बावजूद समाज के हाथ खाली हैं। उन्होंने कहा कि अन्ना हजारे के आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज को एक बार फिर एकजुट होकर अहिंसात्मक तरीके से आंदोलन की आवश्यकता है। हमें कुछ नहीं मिला इससे निराश होने की जरूरत नहीं है। हमें एकजुटत होकर सरकार को अपनी शक्ति का अहसास कराना होगा।

हर बार टेबल पर हारे हम : हेमसिंह भडाना

सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे हेमसिंह भड़ाना ने कहा कि समाज के लोगों ने हर बार आरक्षण आंदोलन में एकजुटता का परिचय  दिया। अपने बेटों कीकुर्बानी दी। मजबूरन सरकार को हमारी बात सुननी पड़ी, लेकिन सरदार व प्रतिनिधि मंडल के फैसलों के कारण समाज टेबल पर हार गया। सरकारों ने समाज को हर बार गुमराह किया है, इसलिए समाज दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ स्वयं निर्णय करें और समाज के हित में फैसला लेने वालों का साथ दें। आरक्षण के लिए अब आवश्यकता है कि समाज गहलोत सरकार को दुबारा बिल लाने के लिए बाध्य करे। जो पार्टी व जनप्रतिनिधि इस कार्य में समाज का साथ नहीं दें उन्हें किसी सूरत में माफ नहीं किया जाए।

बेटियों को दिलाएं उच्च शिक्षा : आभा गुर्जर

सम्मेलन में राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ की उपाध्यक्ष आभा सिंह गुर्जर ने कहा कि हमारे समाज को बेटे-बेटियों में फर्क करना बंद कर देना चाहिए। जिस तरह से बेटे की पढ़ाई पर ध्यान दिया जाता है उसी तरह से अपनी बच्ची को शिक्षा दिलाने के लिए भी संवेदनशल होना चाहिए।  हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि एक लड़की के पढऩे से दो परिवार शिक्षत होते हैं। बेटे की तरह बेटी भी मा-बाप का बुढ़ापे में बेहतर सहारा बन सकती है। उसे उच्च शिक्षा दिलाकर स्वावलंबी बनाएं ताकि वह अपने पीहर और ससुराल दोनों घरों में अपना एक स्थान बना सके। जब तक हमारा समाज शिक्षित नहीं होगा तब तक पिछड़ापन हमारा पीछा नहीं छोड़ेगा।
सम्मेलन में ये लिए निर्णय
तीये की बैठक में चावल व अन्य पकवान नहीं बनाएं।
सामूहिक भोज बंद किया जाए।
शादियों में मिलनी की रस्म बंद की जाए।
गंगा में अस्थि विसर्जन करने के बाद लौटने पर पहरावनी की रस्म बंद की जाए।
इन्होंने भी किया संबोधित
सम्मेलन को महेंद्रसिंह खेड़ला, अमरसिंह कसाना, लक्ष्मण सिंह पाड़ली, कैप्टन बिजेंद्र सिंह, सुरेश नागोरे, कंवरपाल अंधाना, जयसिंह मानोता, मानसिंह गुर्जर, श्रवणसिंह सूबेदार, जनक सिंह, महाराजसिंह खेड़ला, आराम सिंह गुर्जर, साहबसिंह नाहिड़ा सहित अनेक वक्ताओं ने संबोधित कर सामाजिक एकजुटता पर जोर दिया। इस दौरान सुड्डा दंगल में पहुंची महिला कलाकारों ने आकर्षक प्रस्तुति दी।

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