Sunday, October 30, 2011

महापड़ाव में भी बदल सकती है महापंचायत

भांडारेज में 20 नवंबर को होने वाली गुर्जर महापंचायत को लेकर प्रेसवार्ता में बोले कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला
दौसा. आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला ने कहा कि सरकार गुर्जरों के साथ लिखित में समझौता करने के बाद भी उसको लागू करने में जान बूझकर देरी कर रही है, जिसे समाज अब किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगा। इस बार महापंचायत का निर्णय आरक्षण आंदोलन का अंतिम निर्णय होगा। यह महापड़ाव में भी बदल सकती है। वे भांडारेज में 20 नवंबर को होने वाली गुर्जर महापंचायत के संबंध में संवाददाताओं से बात कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि विधानसभा में विधेयक पारित हुआ था, उसमें गुर्जर, रैबारी, बंजारा, गाडिय़ा लुहार को नौकरियों के लिए था। इसमें भी सरकार गुर्जरों को वंचित कर रही है। मुख्यमंत्री की कथनी व करनी में अंतर है। इसके लिए सरकार को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। गुर्जर समाज ने लालसोट में हुए जातीय संघर्ष की सीबीआई से जांच बार-बार मांग करने के बावजूद नहीं कराई गई। महापंचायत में समाज की महिलाएं व बच्चे भी भाग लेंगे।
आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश प्रवक्ता हिम्मत सिंह गुर्जर ने कहा कि सरकार ने गुर्जरों को एक प्रतिशत आरक्षण के लाभ से ही वंचित रखा है। आज तक न्यायालय में याचिका दायर नहीं की। 23 जिलों में आंदोलनकारियों के खिलाफ मुकदमों के निस्तारण की कार्रवाई नहीं की। मुख्यमंत्री ने बजट में देवनारायण आदर्श छात्रावास व आवासीय विद्यालय एवं बयाना में गल्र्स  कॉलेज खोलने की घोषणा की थी, लेकिन 7 माह बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। प्रेस वार्ता में राजस्थान गुर्जर महासभा के जिलाध्यक्ष कंवर पाल गुर्जर, उपाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मण पाड़ली, महेंद्र सिंह, गोविंद दास, सीताराम, सुरेन्द्र, राधेश्याम गुर्जर, बल्लाराम, कन्हैयालाल, आनंदीलाल, विनोद खोर्रा, मांगीलाल आदि मौजूद थे।

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