कर्नल की किलेबंदी

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सेवानिवृत्त सैनिकों ने संभाल रखी है सुरक्षा व्यवस्था
गिरिराज अग्रवाल.पीलूपुरा 
आंदोलनकारियों ने किरोड़ीसिंह बैसला समेत पटरियों पर बैठे लोगों की किलेबंदी कर रखी है। सुरक्षा के लिहाज से युद्ध के दौरान मिलिट्री की ओर से अपनाई जाने वाली रणनीति के मुताबिक ही सुरक्षा व्यवस्था की है। आंदोलनकारियों ने रेलवे ट्रैक के करीब 500 से 800 मीटर का क्षेत्र इस परिधि में लिया हुआ है। सारी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सेवानिवृत्त सैनिकों को सौंपी हुई हैं।
कंट्रोल रूम
कंट्रोल रूम के इंचार्ज कैप्टन भीमसिंह हैं। खाना, चाय, नाश्ता आदि का वितरण भी कंट्रोल रूम के निर्देशानुसार ही वितरित किया जाता है। जिस गांव से भी चाय, नाश्ता आता है, वे पहले कंट्रोल रूम को सूचित करते हैं, वहां माइक पर इसकी घोषणा की जाती है। रात्रि गश्त पर आने वाली टीमों की कंट्रोल रूम से बाकायदा हाजिरी लगाई जाती है। प्रत्येक टीम को देवनारायण भगवान की जय का नारा लगाना होता है।
चैक पोस्ट
रेलवेे ट्रैक के चारों ओर 500 मीटर के दायरे में बनाई जाती हैं। इन पर 15—15 सदस्य रात्रि ड्यूटी करते हैं।
ऐसे भांपते हैं खतरा
यदि ड्यूटी पर तैनात कोई भी टीम एक बार देवनारायण भगवान की जय का नारा लगाती है तो इसका मतलब वहां सब कुछ ठीक है और टीम पूरी तरह से अलर्ट है। यदि कोई खतरा होता है तो वहां मौजूद टीम देवनाराण भगवान के दो या इससे ज्यादा नारे लगाते हैं। इससे संकेत मिलता है कि वहां कोई खतरा है।
किस पर क्या जिम्मेदारी
सीआईडी (3 टीम, प्रत्येक में 15 सदस्य)
टीम एक : रेलवे ट्रैक पर नजर रखती है कि कोई सरकारी संपत्ति को नुकसान तो नहीं पहुंचा रहा है। 
टीम दो : आम आदमी किसानों की संपत्ति, खेतों को नुकसान पहुंचाने वालों पर नजर रखती है।
टीम तीन : उन शराबी लोगों पर नजर रखती है, जो बीमारों, महिलाओं और मजबूरों को तंग करते हैं।
फिटनेस टीम (10 सदस्य)
उडऩदस्ता अथवा अन्य कोई टीम यदि किसी शरारती तत्वों को पकड़कर लाती है तो उसे दंड देते हैं।
उडऩदस्ता टीम (8 सदस्य)
यह टीम हर समय तैयार रहती है। संकेत मिलने पर तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालती हैं।
चौकन्ना टीम (8 सदस्य)
यह इस बात पर नजर रखती हैं कि रात में अंधेरे का फायदा उठाकर पुलिस अथवा प्रशासन आंदोलनकारियों पर कार्रवाई नहीं कर दे। अंदेशा होने पर ये टार्च की रोशनी से सिग्नल देती है।
स्पेशल टाइगर्स फोर्स (30 सदस्य)
यह टीम भीड़ और ट्रैक पर घूमने वाले लोगों और अफवाह फैलाने वालों पर नजर रखती हैं।  
देवनारायण फोर्स (30 सदस्य)
यह टीम धार्मिक तौर-तरीकों से  समझाने और शांति बनाए रखने का प्रयास करती है।
पेट्रोलिंग (2 टीम, प्रत्येक में 20 सदस्य)
ये टीमें बयाना से हिंडौन के बीच सड़क पर पेट्रोलिंग करती रहती हैं। ये टीमें यह नजर रखती हैं कि कहीं कोई व्यक्ति छिपकर तो नहीं बैठा है।
दैनिक भास्कर से साभार

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