Friday, December 31, 2010

सहमति दूर नहीं, वार्ता आज जयपुर में संभव

21 सदस्यीय गुर्जर प्रतिनिधिमंडल करेगा मंत्रियों की कमेटी से बात, किरवाड़ी में हुई वार्ता में 5 % आरक्षण पर अटकी बात  



हिंडौनसिटी/बयाना. गुरुवार को बयाना के पास किरवाड़ी में गुर्जरों की सरकार से पहले दौर की वार्ता हुई। दूसरे दौर की वार्ता के लिए गुर्जर जयपुर आने को राजी हो गए हैं। सरकार का दावा है कि गुर्जरों का 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को जयपुर में मंत्रिमंडलीय उपसमिति से वार्ता करेगा। सरकारी सूत्रों के अनुसार कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला भी आज, कल में सरकार से बातचीत के लिए जयपुर आ सकते हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार देर रात आला अफसरों और उपसमिति में शामिल तीन मंत्रियों की बैठक लेकर हालात की समीक्षा की। इससे पहले कारवाड़ी गांव में १३ सदस्यीय गुर्जर प्रतिनिधिमंडल और अफसरों के बीच करीब ढाई घंटे तक वार्ता हुई। इसमें गुर्जरों ने 9 मुद्दे रखे। इनमें से 8 पर सरकार ने सहमति जताई। गुर्जर पांच फीसदी आरक्षण मिलने तक भर्तियां रोकने पर अड़े रहे। इस मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई। वार्ता में सरकार की ओर से प्रतिनिधित्व कर रहे नगरीय विकास विभाग के प्रमुख सचिव जी.एस. संधु ने बताया कि बातचीत के दौरान प्रतिनिधिमंडल को बताया कि सरकार एक प्रतिशत आरक्षण अभी दे रही है, जबकि चार प्रतिशत सर्वे के बाद दे देगी। इसके लिए विशेष अभियान चलाकर भर्तियां कर दी जाएंगी। वार्ता में शामिल हुए अफसरों में संधु के अलावा भरतपुर के संभागीय आयुक्त राजेश्वर सिंह, भरतपुर कलेक्टर कृष्ण कुणाल, पाली कलेक्टर नीरज के. पवन और स्थानीय पुलिस अधिकारी थे।
वार्ता में क्या हुआ 
गुर्जरों की ओर से रखे गए मुद्दे 
  • 5 प्रतिशत आरक्षण तत्काल मिले। ठ्ठ आरक्षण मिलने तक भर्तियों पर रोक लगाएं। 
  • गुर्जरों के आरक्षण विधेयक को नौवीं सूची में डलवाएं। 
  • गुर्जरों पर लगाए गए मुकदमे वापस लिए जाएं। 
  • घायलों को मुआवजा और आर्थिक सहायता दी जाए। 
  • पिछले आंदोलन में स्थायी घायल हुए गुर्जरों को पेंशन दें। 
  • देवनारायण बोर्ड का गठन किया जाए और बजट बढ़ाएं। 
  • जेलों में बंद गुर्जरों को तुरंत रिहा करें। 
  • जब्त हथियार वापस दें और लाइसेंसों का नवीनीकरण करें। 
सरकार का प्रस्ताव 
सरकार ने गुर्जरों के 5% आरक्षण देने की मांग को छोड़कर सभी पर सहमति जता दी। आरक्षण के मुद्दे पर कहा गया कि 1% अभी दे दिया जाएगा शेष 4% सर्वे कराने के बाद लागू होगा।
सर्वे के समय पर बहस 
गुर्जर : सर्वे का काम तीन माह में पूरा किया जाए। विधेयक संबंधी औपचारिकताएं भी विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर पूरी की जाएं। विधेयक को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करवाया जाए।
सरकार : तीन माह में सर्वे करवाना और विधेयक बनवाना संभव नहीं। हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार एक साल की अवधि में सर्वे करा लिया जाएगा। इसके लिए एजेंसी नियुक्त करने के लिए काम शुरू हो गया है।
सभी खबरें दैनिक भास्कर से साभार

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