Thursday, December 30, 2010

गुर्जर आरक्षण : 29 december2010

वार्ता से पहले रास्ते खुले 
जयपुर-दिल्ली-आगरा और जयपुर-कोटा रेलमार्ग पर दौडऩे लगी ट्रेनें, दिल्ली-मुंबई ट्रैक अभी भी बंद



आरक्षण के लिए आंदोलन कर रहे गुर्जर बुधवार को जयपुर-दिल्ली, जयपुर-आगरा और जयपुर-कोटा-मुंबई रेल ट्रैक से हट गए। इससे पांच-छह दिन से बंद पड़े इन रेलमार्गों पर शाम को फिर से रेलगाडिय़ां दौडऩे लगीं। हालांकि सवाई माधोपुर से मलारना निमौदा रेलवे स्टेशन के बीच आंदोलनकारी पटरियों पर जमे हुए हैं। पीलूपुरा में भी गुर्जर ट्रैक पर बैठे हैं। इस कारण दिल्ली-मुंबई ट्रैक पर ट्रेनें अब भी बाधित हैं।
बांदीकुई के माणोता के पास बुधवार दोपहर दो बजे संभागीय आयुक्त आरपी जैन, आईजी राजीव दासोत, दौसा कलेक्टर आरएस जाखड़ से बातचीत में आंदोलनकारियों ने अपनी मांगें रखीं जिन पर अधिकारियों ने सभी मांगों को राज्य सरकार तक पहुंचाने का भरोसा दिलाया। इसके बाद दोपहर तीन बजे गुर्जरों ने ट्रैक खाली कर दिया। ट्रैक को दुरुस्त करने के बाद करीब शाम ७ बजे यहां से रेल यातायात शुरू हो गया। सबसे पहले आश्रम एक्सप्रेस को रवाना किया गया। शेष & पेज ६
प्रदेशभर में जाम, प्रदर्शन
गुर्जरों ने सवाईमाधोपुर में कुशालीपुरा दर्रे पर कब्जा कर लिया जिससे मध्यप्रदेश खंडार की ओर बसें नहीं जा सकीं। दूसरी ओर झालरापाटन में गुर्जरों ने उज्जैन-इंदौर सड़क मार्ग पर जाम लगा दिया, जिससे झालावाड़-झालरापाटन का इंदौर से संपर्क कट गया।  आंदोलन के दौरान कोटा में रामगंज व इटावा कस्बे, बूंदी व बारां जिलों में भी कई कस्बे बंद रहे। अलवर में जयपुर मार्ग पर आंदोलनकारियों ने रास्ता जाम कर दिया और बसों के शीशे तोड़ दिए वहीं भिवाड़ी दिल्ली मार्ग पर भी जाम लगा दिया। भरतपुर और कुम्हेर 30 दिसंबर को बंद रहेंगे। 
हाड़ौती क्षेत्र : कोटा, बूंदी और बारां में कई कस्बे आंदोलन के समर्थन में बंद रहे।   कोटा में रामगंजमंडी और इटावा कस्बे बंद रहे। बारां में दूध की आपूर्ति प्रभावित रही। बूंदी शहर और देहात के देई, अशोक नगर कस्बे बंद रहे। इससे बूंदी, कोटा से नैनवां की ओर जाने वाली रोडवेज बसों का संचालन नहीं हो सका। झालरापाटन में बुधवार को महापंचायत के बाद गुर्जरों ने शाम पौने पांच बजे से उज्जैन—-इंदौर सड़क मार्ग पर जाम लगा, जिससे झालावाड़-झालरापाटन से इंदौर का सड़क संपर्क कट गया।
मारवाड़ : जोधपुर में संभाग के गुर्जर, राईका, बंजारा व गाडिय़ा लुहारों ने रैली निकाल कर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया।
ढूंढाड़ क्षेत्र : जयपुर संभाग के अलवर में जयपुर और भिवाड़ी मार्ग पर रास्ता जाम करने से बसों का संचालन बंद रहा। कोटपूतली, प्रतापगढ़, करौली व दौसा होकर जयपुर जाने वाली बसों का सातवें दिन भी संचालन नहीं हुआ। कोटपूतली में गुर्जरों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर पड़ाव डाला वहीं चंदवाजी में आंदोलनकारियों ने बाजार बंद कराए। अजमेर के गुर्जरों ने 30 दिसंबर से प्रस्तावित रेलवे ट्रैक जाम टाल दिया है। अब वे चार जनवरी तक रेलगाडिय़ां नहीं रोकेंगे। इन नेताओं का कहना है कि सरकार के साथ कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला की वार्ता विफल रही तो वे 4 जनवरी से ट्रैक जाम करेंगे। 
मेवात क्षेत्र : भरतपुर में कामां दिल्ली सड़क मार्ग ठप पड़ा है। यहां 30 दिसंबर को भरतपुर शहर व कुम्हेर बंद रखने का एलान किया गया है।
मेवाड़ क्षेत्र : बांसवाड़ा में आंदोलनकारियों ने बांसवाड़ा जयपुर मार्ग पर जाम लगाया और वाहन रैली निकाली। 
किस्से लिखे हैं रोटियों पर, पढ़ेगा कौन?
सीधे पीलूपुरा से . बुधवार को सूरज निकला ही नहीं। जयपुर में। पीलूपुरा में। शाम पड़ी तो लगासमय की भयानक बांहों में समाता जा रहा है गुर्जरों का आंदोलन स्थल। एक डरावनी, पथरीली हकीकत। संघर्ष के विशाल दरिया में तैरती और भूख के भयावह मरुस्थल को चीरती हुई हकीकत।
शाम गहराई तो कुछ पोटलियां खुलीं। प्रश्न उपजाइनमें क्या आरक्षण बंधा है? फिर सोचाआरक्षण की पोटलियां अगर गुर्जरों के पास ही होतीं तो यूं पत्थरों, पटरियों पर क्यों पड़े होते? किसी आईएएस, आईपीएस या आरएएस अफसर की कुर्सी पर बैठे काजू खा रहे होते। बहरहाल, पोटलियों में निकलीं रोटियां। ईश्वर माफ करे, लेकिन रोटियों को भी आरक्षण की दरकार थी। जिस आटे से वे बनी थीं, वह कह रहा थाखेत पुकार रहे हैं। पूरे दस दिन बीत गए। राम वनवास जितने वर्षों की संख्या से सिर्फ चार दिन कम। कोई सुग्रीवसा सखा मिला, कोई हनुमानसा भरोसा।
रोटियों पर लगा घी कह रहा थागायें भूखी हैं। एक ही खूंटे से बंधी रम्भा रही हैं। ...और इस रम्भाने में भी नाद आरक्षण का ही है। इस सारे सोच के चलते पेट, पोटली और रोटियों की दूरी कब मिट गई, पता ही नहीं चला। समय अपना काम कर रहा था। शाम की शक्ल रात ने ले ली। घनी, काली, डरावनी रात ने। दिनभर से आरक्षण की जो मांग खड़ी हुई थी, अब आड़ी हो गई। लोग सो चले। यह पक्का हो गया था कि इस रात की सुबह जरूर होगी। गुर्जरों की एक कमेटी गुरुवार सुबह सरकारी कमेटी से बात करने जाने वाली है। जैसे हर आंदोलन को वार्ता की आस होती है। यही आस यहां भी तारी थी। सबने लंबी तान ली। हमने भी कुछ मांगातूंगा, ओढ़ा और वहीं पसर गए... th>

बातचीत पर बनी बात
आज सुबह सरकार से बातचीत के लिए बयाना जा सकता है गुर्जर प्रतिनिधिमंडल
पांच फीसदी आरक्षण की मांग पर अड़े गुर्जर नेता आखिर सरकार के साथ बातचीत को तैयार हो गए हैं। बातचीत के लिए गुरुवार को गुर्जरों का प्रतिनिधिमंडल बयाना जा सकता है या अफसरों को टै्रक के निकट कारवाड़ी या रसेरी में बुला  सकता है। प्रतिनिधिमंडल में बैसला के शामिल होने की संभावना कम है। आंदोलनकारियों से बातचीत के लिए तीन अफसर पिछले पांच दिन से बयाना में डेरा डाले हैं।  सुलह के लिए बातचीत शुरू करने के लिए बैसला ने गुर्जर समाज के नेताओं से बुधवार को बातचीत की। वार्ता के लिए प्रतिनिधिमंडल तय करने के लिए कई दौर की चर्चाएं हुई। इसमें दौरान इन नेताओं के बीच  बहस भी हो गई। नेताओं का कहना था कि अफसरों के हाथ में कुछ नहीं है, इनसे बात करने का कोई आधार नहीं है। इसके बजाय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, ऊर्जा मंत्री डॉ. जितेंंद्रसिंह, केंद्रीय मंत्री सी.पी. जोशी, सचिन पायलट और डीजीपी हरिश्चंद्र मीणा को टै्रक पर बुलाया जाए। आखिर में वार्ता पर सहमति बनी।  
नेतागिरी करने वालों का फटकारा 
कर्नल बैसला ने आंदोलनकारियों को समझाने के दौरान कहा कि जिस परिवार में 10—20 नेता हो जाए, वहां एक राय कभी नहीं बन सकती। बात बिगड़ और जाती है। उन्होंने आंदोलनकारियों से कहा कि वे वही काम करेंगे, जो गुर्जर समाज के हित में होगा। उन्होंने कहा कि जो प्रतिनिधिमंडल जा रहा है, वह सरकार के अफसरों की बात सुनकर वापस आ जाएगा।
सामाजिक न्याय की लड़ाई को राजनीति का लबादा न ओढ़ाएं : बैसला
गुर्जर आंदोलन के नेता किरोड़ी सिंह बैसला ने कहा है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत गुर्जरों की सामाजिक न्याय की लड़ाई को राजनीति का लबादा न ओढ़ाएं। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि अगर यह आंदोलन भाजपा नेताओं के कहने से किया है तो फिर गहलोत बताएं कि भाजपा के शासन में किस कांग्रेसी नेता के कहने से आंदोलन किया। गहलोत के लगाए आरोपों पर स्पष्ट किया है कि वे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गड़करी के बेटे की शादी में नागपुर नहीं गए। बैसला ने कहा कि गहलोत एक तरफ तो वार्ता की बात करते हैं, दूसरी ओर गुर्जरों को यह कह कर भड़का रहे है कि आंदोलन पर कौन सी धारा में क्या सजा हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस लड़ाई में राजस्थान ही नहीं, देशभर के गुर्जर नेता एक हैं।
तिवाड़ी ने की विधानसभा का विशेष सत्र आहूत करने की मांग
प्रतिपक्ष के उपनेता घनश्याम तिवाड़ी ने गुर्जर आंदोलन से उत्पन्न स्थिति पर विचार करने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र आहूत करने की मांग की है। तिवाड़ी ने कहा कि सरकार न तो गुर्जर आंदोलन का समाधान कर पा रही है और न ही जनता की परेशानियों को कम कर पा रही हैं। उलटे विज्ञापन देकर आंदोलनकारियों के खिलाफ जनता को भड़काने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भाजपा पर मनगढ़ंत आरोप लगाकर आंदोलन पर राजनीति कर रहे हैं। तिवाड़ी ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट द्वारा विधेयक पर रोक लगाने का असली कारण विधेयक की त्रुटि नहीं बल्कि राज्य सरकार द्वारा सही तरीके से पैरवी नहीं कर पाना है।अब कांग्रेस सरकार अपनी असफसता छिपाने के लिए विधेयक में कमी की बात को प्रचारित कर रही है।
सब्र की परीक्षा न लें : धारीवाल 
राज्य के गृहमंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत के सकारात्मक परिणाम निकलेंगे। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी सरकार के सब्र की परीक्षा न लें। अगर जनता तकलीफ में होगी तो सरकार को कड़े फैसले लेने होंगे। गुर्जरों और जनता की समस्याएं प्राथमिकता पर हैं, लेकिन कई बार सरकार को व्यापक हित में कदम उठाना जरूरी होता है। धारीवाल ने कहा कि एसबीसी में शामिल गुर्जर सहित चार जातियों और आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों का सर्वे साथ-साथ कराया जाएगा। इसके लिए गुर्जरों और अन्य जातियों की राय लेकर न्यूट्रल एजेंसी का गठन किया जाएगा, जो एक साल में रिपोर्ट दे सके। 
 सभी खबरें दैनिक भास्कर से साभार

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