राजस्थान में गुर्जर आरक्षण आंदोलन

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  • सितंबर 2006 में गुर्जर आन्दोलन का सिलसिला शुरू हुआ कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला के नेतृत्व में सैकड़ों गुर्जर करौली जिले में हिंडौन स्टेशन पर आ जमे और गाडिय़ों की आवाजाही रोक लगा दी। सरकार ने अपने अधिकारियों को हेलीकॉप्टर से मौके पर भेजा और गुर्जर नेताओ को आन्दोलन वापस लेने पर राजी कर लिया। इससे गुर्जर काफी उत्साहित हुए और आगे के आन्दोलन की तैयारी शुरू कर दी।
  • 29 मई, 2007 को गुर्जर अनुसूचित जनजाति में आरक्षण की मांग करते हुए सड़कों पर उतरे और दौसा के पाटोली में रास्ता रोक दिया। पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच हुई हिंसा में छह लोग मारे गए। आंदोलनकारी शवों को लेकर बैठ गए और सरकार को गुर्जरों से बात करने के लिए आगे आना पड़ा।
  • 4 जून, 2007 को तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से सुलह के बाद अपना आन्दोलन वापस ले लिया। मगर ये सुलह लम्बी नहीं चली और 23 जून को गूर्जरों ने फिर महापंचायत की।
  • दिसंबर 2007 में राज्य सरकार ने गुर्जरों के आरक्षण के मामले पर गठित जस्टिस जसराज चोपड़ा आयोग की रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजने का फैसला किया। रिपोर्ट में गुर्जरों को एसटी में शामिल करने की सिफारिश नहीं की गई थी, बैसला ने चोपड़ा आयोग की रिपोर्ट को खारिज कर दिया।
  • 23 मई, 2008 को भरतपुर जिले में पीलुपुरा में गुर्जरों ने रेललाइन पर कब्ज़ा कर लिया। पुलिस से उनकी भिडंत हुई और 16 आन्दोलनकारी और एक पुलिसकर्मी की मारे गए। आंदोलनक करीब महीने भर तक चला। विशेष श्रेणी में आरक्षण के आश्वासन के बाद गुर्जरों ने आन्दोलन वापस ले लिया गया। समझौते के तहत गूर्जर और कुछ अन्य जातियों को विशेष श्रेणी में 5 फीसदी आरक्षण दिया जाना था। आरक्षण विधयेक विधान सभा से पारित हुआ। लेकिन राजभवन में अटका रहा क्योंकि राज्यपाल एसके सिंह ने इस पर दस्तखत करने में देरी की।
  • 22 अगस्त 2008 को गूजरों ने फिर महापंचायत की और विधयेक लागू करने की मांग की।  फिर 26 जुलाई 2009 को करौली जिले में गूजरों ने आन्दोलन शुरू कर दिया और कुछ समय बाद सरकार के आश्वान के बाद आन्दोलन वापस ले लिया।
  • अक्टूबर 2009 को राजस्थान हाईकोर्ट ने गुर्जरों को विशेष श्रेणी में 5 फीसदी और आर्थिक रुप से पिछड़े सवर्णों को 14 फीसदी आरक्षण पर रोक लगा दी। अदालत का तर्क था कि आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकती।
  • मार्च 2010 में गुर्जरों ने 5 फीसदी विशेष आरक्षण की मांग करते हुए आंदोलन छेडऩे की चेतावनी दी। दौसा जिले के गाजीपुर से आंदोलन शुरू किया।
  • 5 मई 2010 को सरकार गुर्जरों को पांच फीसदी आरक्षण देने पर राजी हुई। सरकार और गुर्जर समुदाय के बीच समझौते के बाद बैसला ने आंदोलन खत्म करने की घोषणा की। एक फीसदी आरक्षण तुरंत और 4 फीसदी हाईकोर्ट के फैसले के बाद देने का आश्वासन सरकार ने दिया।
  • 20 दिसंबर को राज्य में एक लाख भर्तियों की घोषणा के बाद गुर्जरों ने फिर आंदोलन छेड़ दिया। बैसला अपने समर्थकों के साथ पीलूपुरा में पटरियों पर आ डटे।
  • 22 दिसंबर 2010 हाईकोर्ट ने विशेष आरक्षण विधेयक पर लगी रोक को जारी रखने का आदेश दिया। सरकार को साल भर के अंदर संख्यात्मक आंकड़ों जुटाने को कहा। विशेष आरक्षण पर रोक से गुर्जर आंदोलन और ज्यादा भड़का।

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