बैसला ने इसरानी कमेटी पर उठाए सवाल

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कहा, कमेटी के सदस्यों ने गुर्जर आरक्षण विरोधी बयान दिए, इसरानी कमेटी से मांगा 50 प्रतिशत के भीतर ही विशेष आरक्षण
जयपुर. गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला ने हाई कोर्ट के आदेश पर गठित इसरानी कमेटी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं।
कमेटी के सामने पक्ष रखने के कुछ ही घंटों बाद गुरुवार को बयान जारी कर कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला ने कमेटी के सदस्यों को गुर्जर आरक्षण के प्रति बायस्ड सोच रखने वाला करार दिया है। राजस्थान गुर्जर आरक्षण संघर्र्ष समिति के अध्यक्ष के नाम से जारी लिखित बयान में बैसला ने आरोप लगाया कि कमेटी के सदस्यों ने गुर्जर आरक्षण के खिलाफ  सार्वजनिक तौर पर बयान दिए हैं। इन सदस्यों की सोच गुर्जर आरक्षण पर निष्पक्ष नहीं है, इस जगजाहिर तथ्य को देखते हुए इस कमेटी की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लग जाता है।
बैसला ने अपने बयान में कहा कि राजस्थान सरकार विधानसभा में लिए गए संकल्प और विशेष पिछड़ा वर्ग की भावनाओं के प्रति गंभीर नहीं है। सरकार ने आरक्षण पर हाई कोर्ट के स्टे ऑर्डर पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देना उचित नहीं समझा। इससे मामले के निबटारे में देरी हुई। राज्य के महाधिवक्ता ने हाई कोर्ट को यह सूचना नहीं दी कि गुर्जर आरक्षण पर पहले से ही 2007 में चौपड़ा कमेटी बनाई गई थी, जिसके कारण दूसरी कमेटी बनाने का आदेश दिया। 
पहले रखा पक्ष, फिर उठाए सवाल : इससे पहले दिन में इसरानी कमेटी के सामने बैसला ने ओबीसी के 21 प्रतिशत आरक्षण में से  पांच प्रतिशत विशेष आरक्षण की मांग रखी। कमेटी के सामने पक्ष रखने से पहले  सुबह बैसला ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से भी मुलाकात की थी।
सरकार को तीन मई तक का अल्टीमेटम
कमेटी के साथ बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में बैसला ने कहा कि हमारी मुख्य मांग 50 प्रतिशत के भीतर ही पांच प्रतिशत आरक्षण की है। जब तक आरक्षण नहीं मिल जाता तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा। कमेटी के सामने भी हमने यही पक्ष रखा है कि सरकार से तो पांच प्रतिशत आरक्षण मिल चुका है, अब तो इसे लागू कराना है। उन्होंने बताया कि हमने आरक्षण लागू करने के लिए सरकार को तीन मई तक का समय दिया है। इधर, कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस इंद्रसेन इसरानी ने बताया कि कमेटी का प्रयास है कि आरक्षण मामले का सर्वमान्य हल निकले जो गुर्जरों को भी मंजूर हो और सरकार को भी कोर्ट में कोई दिक्कत नहीं आए। उन्होंने बताया कि कमेटी को रिपोर्ट देने में कोई समय सीमा नहीं दी गई है फिर भी जल्द काम पूरा कर लिया जाएगा। सरकारी पक्ष और गुर्जर नेताओं का पक्ष जानने के बाद अब कमेटी ओबीसी में से ही पांच प्रतिशत आरक्षण देने या अन्य विधिक रास्ता तलाशने के लिए कानूनविदों की राय लेगी। कमेटी के साथ बैठक से पहले बैसला ने प्रमुख गुर्जर नेताओं के साथ बंद कमरे में चर्चा की। चर्चा में गुर्जर नेता कैप्टन हरप्रसाद, डॉ. रूप सिंह, एडवोकेट अतर सिंह तथा मान सिंह गुर्जर सहित 20 से अधिक प्रतिनिधि शामिल थे।
 (दैनिक भास्कर से साभार)

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