बैसला का फैसला खारिज, 13 से आंदोलन

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सिकंदरा में दूसरे गुट ने बुलाई महापंचायत, विशेष पिछड़ा वर्ग के एक प्रतिशत आरक्षण के बहिष्कार की भी घोषणा
जयपुर . विशेष पिछड़ा वर्ग में 1 प्रतिशत आरक्षण के संबंध में सरकार से किए गए कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला के समझौते को गुर्जरों के एक गुट ने नकार दिया है। समझौते और 1 प्रतिशत आरक्षण के बहिष्कार की घोषणा करते हुए गुर्जर समाज के लोगों ने 13 मई से आंदोलन की घोषणा की है। गुरुवार को सिकंदरा में गुर्जर महापंचायत  होगी। दिल्ली के पूर्व विधायक रामवीरसिंह विधूड़ी ने आरोप लगाया कि कर्नल बैसला ने सरकारों से तीनों समझौतों में समाज से धोखा किया। पहले समझौते में अपनी गरीबी दूर की, दूसरे में लोकसभा टिकट लिया, समधी को देवनारायण बोर्ड में नियुक्ति दिलाई और रिश्तेदार ब्रह्मसिंह गुर्जर को आरपीएससी में भेजा। अब तीसरे समझौते में बेटी सुनीता के लिए राज्यसभा का टिकट तय किया है।
बोरियां भरकर दिए थे नोट
उन्होंने आरोप लगाया कि पहली बार पाटोली का आंदोलन हुआ तो दिल्ली के गुर्जरों ने बैसला को बोरियां भरकर नोट दिए थे, जिसका आज तक हिसाब नहीं दिया। प्रेस कांफ्रेंस में गुर्जर  नेता नाथूसिंह गुर्जर, कालूलाल गुर्जर, गोपीचंद गुर्जर, रामलाल गुर्जर, शील धाभाई और रामगोपाल गार्ड थे।  विधूडी ने सोमवार को कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता छोडऩे की घोषणा की। वे लोकसभा चुनाव के समय एनसीपी छोड़कर कांग्रेस में आए थे।
अब क्या चाहते हैं गुर्जर
गुर्जरों को 5 प्रतिशत आरक्षण 50 प्रतिशत के अंदर ही दिया जाए। पिछले आंदोलनों के दौरान जेलों में बंद सभी गुर्जरों को रिहा किया जाए। पिछली सरकार से हुए समझौते के मुताबिक आंदोलन में अशक्त हुए लोगों को पेंशन दी जाए। देवनारायण बोर्ड के 295 करोड़ रुपए के बजट को बहाल करते हुए 200 करोड़ और देकर इसका बजट 500 करोड़ रुपए किया जाए। 
१' आरक्षण नामुमकिन!
पूर्व मंत्री नाथूसिंह गुर्जर ने कहा कि विशेष ओबीसी का 1 प्रतिशत लागू ही नहीं हो सकता। गुर्जर युवाओं को 100 पदों पर 1 पद मिलेगा। किसी भी विभाग में इतने पदों पर एक साथ भर्तियां होती नहीं हैं और आरक्षण का लाभ भी रोस्टर प्रणाली से मिलता है। उन्होंने फैसले की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि बैसला खुद ही समझौता करते हैं और खुद ही अपने समझौते के खिलाफ हर बार आंदोलन कर लेते हैं। इस तरह समाज से धोखा कर रहे हैं। 
तब वसुंधरा की शह थी
पूर्व विधायक गोपीचंद गुर्जर ने आरोप लगाया कि कर्नल बैसला ने पीलूपुरा का आंदोलन तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधराराजे से मिलकर किया था। इस बार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिलकर भी गुपचुप समझौता किया है। दोनों ही पार्टियों ने गुर्जरों के साथ धोखा किया है। 
बैसला का पलटवार
कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला ने आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि ये बाहरी लोग हैं।  दिल्ली में चुनाव हारने के बाद इनका आधार खत्म हो चुका है। अब ये लोग राजस्थान में राजनीतिक जमीन तलाशने आए हैं। इनके आरोपों का कोई आधार नहीं है।
मुख्यमंत्री से मिले बैसला : बैसला ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से सोमवार को सुबह डेढ़ घंटे मुलाकात की और उन्होंने मुकदमों की वापसी, बंदियों की रिहाई और एक प्रतिशत आरक्षण की वैधानिकता  स्पष्ट करने पर चर्चा की।
भास्कर से साभार

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