फिर नहीं बनी बात

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जयपुर कूच की चेतावनी के बाद खलबली 

अजमेर. गुर्जरों की मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से अगले तीन दिन में फिर वार्ता होगी। इस बीच 29 मार्च की  देर रात गुर्जर नेता किरोड़ीसिंह बैसला ने घोषणा की कि मांग पूरी होने तक अजमेर में महापड़ाव जारी रहेगा।  घोषणा के बाद बैसला भी महापड़ाव में शामिल हो गए।
रसूलपुरा गांव के एक मकान में कर्नल बैसला की अजमेर कलेक्टर राजेश यादव और एसपी हरिप्रसाद शर्मा से बातचीत हुई। कलेक्टर ने बैसला की मुख्यमंत्री से फोन पर बात भी करवाई। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने 3 दिन में वार्ता का आश्वासन दिया है। उनका कहना था कि हम आरक्षण देने के पक्ष में है, लेकिन कानूनी अड़चन के चलते फिलहाल मजबूरी है।
कलेक्टर ने मुख्यमंत्री को कर्नल बैसला से हुई बातचीत और आंदोलन की पूरी स्थिति से भी अवगत करवाया। मुख्यमंत्री से वार्ता के बाद कलेक्टर और बैसला के बीच लंबी बात भी हुई। प्रशासन चाहता था कि किसी तरह महापड़ाव उठा लिया जाए, लेकिन बैसला चाहते थे कि प्रशासन यह वादा करे कि जब तक वार्ता सफल नहीं होती तब तक भर्ती प्रक्रिया रोक ली जाएगी। कलेक्टर का कहना था कि इतना बड़ा भरोसा वे नहीं दे सकते। हालांकि एक बार स्थिति यह भी आई कि वार्ता चलेगी तब तक भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं करने का आश्वासन दिया जाए, लेकिन बैसला का कहना था कि कलेक्टर यह घोषणा महापड़ाव स्थल पर जाकर करें ताकि पांच दिन से बैठे गुर्जरों को भरोसा हो सके लेकिन वे इसके लिए तैयार नहीं हुए। इसी बीच वार्ता में अजमेर के संभागीय आयुक्त भी शामिल हो गए। रात करीब साढ़े 11 बजे वार्ता विफल हो गई और कर्नल बैसला महापड़ाव स्थल पहुंच गए। उन्होंने वार्ता का ब्यौरा गुर्जरों को दिया। बैंसला के आग्रह पर कलेक्टर राजेश यादव भी मंच पर आए और मुख्यमंत्री का संदेश दिया। इसमें उन्होंने आग्रह किया कि महापड़ाव उठा लिया जाए। लेकिन, मुख्यमंत्री का संदेश गुर्जरों और कर्नल बैंसला ने ठुकरा दिया। बैंसला ने आरोप लगाया कि सरकार की नीयत साफ नहीं है, लिहाजा गुर्जर समाज 'अभी नहीं तो कभी नहींÓ के नारे के साथ महापड़ाव जारी रखेगा।  
 "चाय के प्याले और होठों के बीच बहुत सी बाधाएं"
 वार्ता विफल होने के बाद कर्नल बैंसला ने पत्रकारों से कूटनीतिक भाषा में कहा कि चाय के प्याले और होठों के बीच बहुत सी बाधाएं हैं। बैंसला ने कहा कि सरकार चाहती तो पांच माह के समय में हमें 5 प्रतिशत आरक्षण दे सकती थी लेकिन नीयत साफ नहीं है, इसलिए बातचीत ही चल रही है। उन्होंने घोषणा की कि सरकार बुलाएगी तो वार्ता में जरूर जाएंगे, लेकिन आरक्षण से कम कुछ मंजूर नहीं है। सरकार आरक्षण नहीं दे पाई तो जयपुर कूच किया जाएगा। तब तक वे अजमेर महापड़ाव में खुद भी मौजूद रहेंगे।
(दैनिक भास्कर से साभार)

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