गुर्जरों का जयपुर कूच 6 दिन टला

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फसल कटाई और परीक्षाओं को बताया वजह, जगह-जगह पड़ाव जारी रहेंगे
जयपुर. गुर्जरों का जयपुर कूच फिलहाल एक सप्ताह के लिए टल गया है। फसलों की कटाई और परीक्षाओं को देखते हुए 28 मार्च को गुर्जर नेता किरोड़ीसिंह बैसला ने पंच पटेलों की राय के बाद यह फैसला किया। कूच का निर्णय 6 दिन बाद होने की संभावना है।
जयपुर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से वार्ता के बाद बैसला रविवार सुबह महापड़ाव स्थल पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के सामने 5' आरक्षण की मांग रखी। उनसे कहा गया कि वे कोई भी तरीका निकालकर गुर्जरों को 5' आरक्षण दें। बाकी चार मांगों पर सरकार ने सहमति जताई है। इनमें मृतक आश्रितों को नौकरी, जेलों में बंद आंदोलनकारियों की रिहाई, घायलों को सहायता और मुकदमे वापस लेने की मांग है।
गुर्जर प्रतिनिधियों की मुख्यमंत्री से मुलाकात : अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को पूर्व विधायक गोपीचंद गुर्जर के साथ मुख्यमंत्री से चर्चा की। मुलाकात के बाद कसाना ने भास्कर को बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री के सामने 5 प्रतिशत आरक्षण जल्दी देने की मांग रखी है। सरकार से कहा है कि हाईकोर्ट में प्रभावी पैरवी करके रोक को जल्दी हटवाए और सुप्रीम कोर्ट में गुर्जरों की मदद करे। मौजूदा बेकेंसी में 5' पद खाली रखते हुए सरकार बाकी पदों पर भर्तियां कर सकती है। मुख्यमंत्री ने उन्हें पूरी मदद करने का भरोसा दिलाया है। इस प्रतिनिधि मंडल में विधायक रामस्वरूप कसाना, अतरसिंह भड़ाना और श्रीनाथ गुर्जर सहित कई लोग शामिल थे।
पैकेज मंजूर करने पर ही पूरी होंगी अन्य मांगें : धारीवाल
गृह मंत्री शांति धारीवाल ने कहा है कि गुर्जरों पर मुकदमे वापस लेने पर तभी विचार किया जाएगा, जब वे सरकार के पैकेज को मंजूर करें। सरकार किसी भी कीमत पर प्रदेश में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति नहीं बिगडऩे देगी। धारीवाल गुर्जरों से बात करने के लिए बनी उच्च स्तरीय समिति के भी अध्यक्ष हैं।
गुर्जर प्रतिनिधियों से बात करने के बाद धारीवाल ने बताया कि सरकार ने गुर्जरों से कहा है कि वे हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार करें। हाईकोर्ट का फैसला आने पर सरकार निश्चित रूप से उन्हें 5 प्रतिशत आरक्षण देगी। बाकी जिन चार मांगों पर मुकदमे वापस लेने, मृतक आश्रितों को नौकरी, बंदियों की रिहाई और घायलों को मुआवजे आदि पर तभी अमल होगा, जब गुर्जर पूरा पैकेज मंजूर करेंगे। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी पैरवी के लिए सरकार तैयार है।
कानून व्यवस्था की समीक्षा : धारीवाल ने अपने निवास पर पुलिस और गृह विभाग के अधिकारियों के साथ प्रदेश में कानून व्यवस्था की समीक्षा की। धारीवाल ने बताया कि अजमेर में कुछ गुर्जर महापड़ाव के रुप में एकत्रित हुए थे। जबकि कुछ लोग गाजीपुर में धरने पर बैठे हैं। बाकी प्रदेशभर में शांति है।
विधानसभा पर 2 अप्रैल को सांकेतिक धरना
राजस्थान गुर्जर महासभा ने 5 प्रतिशत आरक्षण के मुद्दे पर अहिंसात्मक आंदोलन की घोषणा करते हुए 2 अप्रैल को विधानसभा पर सांकेतिक धरना देने का फैसला किया है। रविवार को महासभा की बैठक में पूर्व मंत्री नाथूसिंह गुर्जर, कालूलाल गुर्जर, पूर्व विधायक दाताराम गुर्जर, जयपुर के पूर्व जिला प्रमुख रामगोपाल गार्ड सहित कई लोग मौजूद थे। इनमें नाथूसिंह गुर्जर ने कहा कि समाज के पिछड़ेपन को देखते हुए हिंसात्मक आंदोलन से बचना चाहिए।
अजमेर में तनाव भरा रहा दिन
अजमेर में लाडपुरा के निकट महापड़ाव पर बैठे गुर्जर अभी बैसला के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। इधर हाईवे पर महिलाओं द्वारा लाठियां, कुल्हाडिय़ां लहराने से प्रशासन और पुलिस हरकत में आ गई। बैसला की सरकार के साथ हुई बातचीत में कोई नतीजा नहीं निकलने से महापड़ाव स्थल पर पूरा दिन तनाव में बीता।
आंदोलन को तैयार रहें : बैसला
कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला ने कहा कि हमें तो 5' आरक्षण चाहिए। यह कैसे और कहां से देना है, यह सरकार सोचे। हमने समाज के लोगों से 6 दिन में फसलें काट लेने और उसके बाद आंदोलन के लिए तैयार रहने को कहा है।
(दैनिक भास्कर से साभार)

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