बात निकली, हल नहीं

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गहलोत और बैसला के बीच बातचीत अधूरी रही, मुख्यमंत्री ने सरकार की सीमाएं बताईं, बैसला 50% के भीतर आरक्षण पर अड़े, वार्ता का एक और दौर होगा, तिथि तय नहीं
जयपुर . गुर्जरों के पांच प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर शनिवार रात मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और गुर्जर नेता किरोड़ीसिंह बैसला के बीच  करीब सवा घंटे चली बातचीत अधूरी रही। दोनों पक्षों ने वार्ता के एक और दौर का संकेत दिया है, लेकिन यह कब होगा, अभी यह तय नहीं है। बैसला ने कहा कि उन्हें सरकार के रुख से उम्मीद कम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुर्जरों को आरक्षण के लिए हम सुप्रीम कोर्ट तक सहयोग करेंगे। बैसला, गहलोत के सिविल लाइंस स्थित आवास पर पूरे लावलश्कर के साथ पहुंचे, लेकिन मुख्यमंत्री के साथ वार्ता में वे अकेले ही रहे। आखिर समय में कुछ देर के लिए उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. जितेंद्रसिंह भी मौजूद रहे। वार्ता के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि बैसला से वार्ता सकारात्मक रही है। वार्ता का एक और दौर होगा। उधर, बैसला ने कहा कि वार्ता सौहार्दपूर्ण रही, लेकिन फिलहाल हमें सिर्फ आश्वासन मिला है। ठोस कुछ नहीं कहा गया। आंदोलन जारी रहेगा।  
दिनभर चली कवायद 
गुर्जरों सहित चार जातियों के पांच प्रतिशत आरक्षण को लेकर आंदोलन कर रहे गुर्जरों से साथ दूसरे दौर की बातचीत में शनिवार दोपहर बाद सरकार ने चार मुद्दों पर सहमति दे दी। लेकिन गुर्जर नेता कर्नल बैसला 5 प्रतिशत आरक्षण के मुद्दे पर अड़े रहे। यह मामला मुख्यमंत्री के स्तर पर वार्ता के लिए छोड़ दिया गया। पहले दौर की वार्ता शुक्रवार को होने के बाद शनिवार को दूूसरे दौर की वार्ता के लिए बैसला को जयपुर बुलवाया गया।   
चार मुद्दों पर बनी सहमति  
करीब दो घंटे तक चली बातचीत में इन मुद्दों पर सहमति बनी :  1. पिछले आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों को नौकरी के नियमों में शिथिलता दी जाएगी, जिससे अविवाहित मृतकों के परिजनों को नौकरी में अड़चन न आए।  2. कोर्र्ट में चल रहे मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया तीन माह में शुरू कर दी जाएगी। इसके लिए उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया जाएगा। 3. गुर्जर बाहुल्य क्षेत्र में लोगों के आम्र्स लाइसेंसों के नवीनीकरण किए जाएंगे। 4.  गंभीर घायलों को विकलांगता पेंशन देने के साथ उनको रोजगार कमाने लायक बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा।    
सभी को आरक्षण समान    
कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला ने स्पष्ट किया कि विशेष आरक्षित वर्ग में दिए जाने वाले आरक्षण में चारों जातियों का समान अधिकार है। गुर्जरों को इसमें इसमें से आधा देने की बात निराधार है।    
अफसरों के साथ आए कर्नल
शनिवार को सुबह साढ़े नौ बजे डीआईजी सीबी शर्मा और परिवहन आयुक्त निरंजन आर्य गाजीपुर से लेकर आए। करौली कलेक्टर नीरज के. पवन और दौसा कलेक्टर लालचंद असवाल भी साथ थे। ये सीधे यहां होटल तीज पहुंचे।    
आरक्षण मिलने तक जारी रहेगा आंदोलन    
सुबह मीडिया से कर्नल बैसला के सहयोगी डॉ. रूप सिंह ने कहा है कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक कि गुर्जर और अन्य पिछड़ा वर्ग को न्याय नहीं मिल जाता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं की जा रही है।लेकिन यह संतोषजनक है कि कल की वार्ता सकारात्मक रही।  
ये थे सरकार की ओर से 
पहले बैसला और गुर्जर प्रतिनिधि मंडल की वार्ता गृह मंत्री शांति धारीवाल की अध्यक्षता में गठित समिति से हुई। इसमें परिवहन मंत्री ब्रज किशोर शर्मा और ऊर्जा मंत्री डॉ. जितेंद्रसिंह हैं।   
ये थे गुर्जर समाज के प्रतिनिधि
कर्नल बैसला के साथ कैप्टन हर प्रसाद, लीलाधर, हिम्मतसिंह, डॉ रूपसिंह, एडवोकेट अतरसिंह, मानधाता सिंह, राजेंद्रसिंह टोंक, भूरा भगत बयाना, कैप्टन जगरामसिंह, बंटी भरतपुर, शिवलाल और महराराम देवासी शामिल थे।  
गुर्जर चाहते हैं 50' के भीतर आरक्षण   
बैसला का कहना है कि सरकार गुर्जरों सहित चार जातियों का आरक्षण 50 प्रतिशत कुल आरक्षण के भीतर ही करे। इससे आरक्षण पर रोक नहीं लगेगी।  उनका कहना है कि सरकार 80 हजार पदों पर भर्ती शुरू करे तो ५ज् स्थान विशेष पिछड़ों के लिए छोड़े। यानी 4000 पद बाद में गुर्जरों आदि के लिए अलग से भरे जाएं।  
2-4 प्रतिशत ज्यादा आरक्षण तर्कसंगत  
सुप्रीम कोर्ट के वकील सूरतसिंह का तर्क है कि इंदिरा साहनी केस में फैसला 50ज् से अधिक आरक्षण नहीं देने का है, लेकिन विशेष परिस्थिति में छूट भी है। उन्होंने कहा सरकार को विशेष पिछड़ों और आर्थिक पिछड़ों के आरक्षण को अलग करना होगा। अगर २ से ४ज् आरक्षण सीमा से ज्यादा होता भी है तो तर्क दिया जा सकता है।
कोर्ट के आदेशों से बाहर जाना संभव नहीं : गहलोत
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अनुसार उन्होंने बैसला के सामने ये तर्क रखे
1. 5% आरक्षण पर हाईकोर्ट की रोक है। उससे बाहर जाना संभव नहीं है।
2. सरकार गुर्जर आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट में भी पैरवी में कसर नहीं छोड़ेगी।
3. ५०' से ज्यादा कोटे के तमिलनाडु, महाराष्ट्र आदि के मामलों की तरह राजस्थान का मामला भी जुड़े तो ठीक।
4. गुर्जर समाज को बजट में दिए गए पैकेज का पूरा लाभ उठाना चाहिए। भर्ती पर रोक की मांग जायज नहीं।
मैं आरक्षण मांगता रहा, वे कानून बताते रहे : बैसला
देर रात कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला से बातचीत
मुख्यमंत्री से वार्ता का क्या नतीजा निकला? 
उन्होंने आश्वासन दिए हैं। मुझे उम्मीद कम है।
आखिर बात क्या हुई? 
मैंने कहा कि आश्वासन नहीं, आरक्षण दीजिए। वे कह रहे थे कि तरीका बताइए। मैंने बताया कि 50 प्रतिशत की सीमा में आरक्षण दे दीजिए। वे सुनने को तैयार नहीं हुए। उन्होंने कहा, ये संभव नहीं है।
अब जयपुर कूच के एलान का क्या होगा? 
संघर्ष जारी रहेगा। कूच भी करेंगे। पहले गुर्जर भाइयों से बात करूंगा। फिर बताऊंगा -आगे क्या करेंगे।
(दैनिक भास्कर से साभार)

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