Thursday, March 25, 2010

जयपुर कूच : किसका क्या मत

बैसला के पांच प्रतिशत विशेष आरक्षण की मांग को लेकर 26 मार्च को जयपुर कूच पर गुर्जर समाज के राजनेताओं ने अलग-अलग राय व्यक्त की है। अधिकांश नेताओं ने अने आप को आंदोलन से अलग रखा है। जयपुर की पूर्व महापौर शील धाभाई एवं गंगापुर सिटी से भाजपा नेता मानसिंह गुर्जर ने आंदोलन में बैसला का साथ देने की बात कही है।
कोर्ट के फैसले की प्रतीक्षा करनी चाहिए : गार्ड
पूर्व जिला प्रमुख एवं राजस्थान गुर्जर महासभा के प्रदेशाध्यक्ष रामगोपाल गार्ड का कहना है कि हमारे आरक्षण का मामला कोर्ट में है। फैसला होने तक सरकार ने जो सहूलियतें गुर्जर युवाओं को दी हैं वे पर्याप्त हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि इस आंदोलन से बैसला कोई राजनीतिक लाभ लेना चाहते हैं। पहले ही हमारे 71 लोग मारे गए और कोई नतीजा भी नहीं निकला। हमें कोर्ट के फैसले की प्रतीक्षा करनी चाहिए।
बैसला पर विश्वास नहीं किया जा सकता : नाथूसिंह
पूर्व विधायक-सांसद (भाजपा) नाथूसिंह गुर्जर का कहना है कि हम गुर्जरो के 5 प्रतिशत आरक्षण के साथ हैं, लेकिन आंदोलन की स्टाइल सही नहीं है। जब विधेयक आया था, तब हमने 14 और 5 प्रतिशत आरक्षण को अलग करवाने के लिए कहा था। परंतु बैसला ने बात नहीं मानी। अब तक आरक्षण नहीं मिलने के लिए भी बैसला ही जिम्मेदार हैं। उन्होंने एसटी का दर्जा दिए जाने की मूल मांग छोड़ दी और 5 प्रतिशत की मांग पर आ गए। पूर्व के अनुभवों को देखते हुए बैसला जैसे गैर जिम्मेदार लोगों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। हम इस बारे मुख्यमंत्री से बात करके रास्ता निकालेंगे।
हम अलग से आंदोलन करेंगे : कालूलाल
पूर्व ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री भाजपा कालूलाल गुर्जर ने कहा कि बैसला भले ही पार्टी के आदमी हैं, लेकिन आंदोलन का फैसला पार्टी का नहीं है। इस आंदोलन का कोई रिजल्ट भी नहीं आना है। हम गुर्जर महासभा की ओर से अलग से अहिंसात्मक आंदोलन करेंगे। मुख्यमंत्री से बात करके कहेंगे कि यह मामला कोर्ट में अटक गया है तो वे 5 प्रतिशत आरक्षण का नया कानून बनाकर विधानसभा में पारित कराएं।
हम लडऩे को तैयार बशर्ते बैसला समझौता नहीं करे : गुंजल
पूर्व विधायक भाजपा प्रहलाद गुंजल ने कहा कि गुर्जरों को 5 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए। बैसला का आंदोलन केवल नौटंकी है। पाटोली का पहला आंदोलन बाई एक्सीडेंट था। उसके बाद के दोनों आंदोलन सरकारी मिलीभगत से हुए थे। हर आंदोलन में बैसला ने अपने लोग मरवाए और सरकार को राहत देने का काम किया। हम 5 प्रतिशत आरक्षण के लिए लडऩे को तैयार हैं, बशर्ते बैसला समझौते की टेबिल पर नहीं जाएगा। यह समाज तय करे।
अब कमान गुर्जर महासभा संभालेगी : गोपीचंद
अखिल भारतीय गुर्जर महासभा प्रदेशाध्यक्ष गोपीचंद गुर्जर ने कहा कि गुर्जरों को 5 प्रतिशत आरक्षण 50 प्रतिशत में ही मिलना चाहिए। बैसला का आंदोलन सरकारी मिलीभगत का खेल है। डॉ. जितेन्द्रसिंह और बैसला से समाज का भरोसा उठ गया है। इस आंदोलन की कमान अब अ.भा. गुर्जर महासभा संभालेगी। इस मांग को लेकर जयपुर में गुरुवार को रामलीला मैदान से गवर्नमेंट हॉस्टल तक मौन जूलूस निकाला जाएगा।
बैसला अब आंदोलन के नहीं, भाजपा के नेता : भड़ाना
पूर्व विधायक अतरसिंह भड़ाना ने कहा कि बैसला अब आंदोलन के नहीं बल्कि भाजपा के नेता हैं। उसने वसुंधराराजे से समझौता ही ऐसा किया था, जिससे गुर्जरों को कुछ नही मिले। आर्थिक पिछड़ों का 14 प्रतिशत आरक्षण साथ जुड़वाने से हमारा हक कोर्ट में अटक गया। संविधान में आर्थिक आरक्षण की कोई व्यवस्था ही नहीं है। आर्थिक पिछड़ों की लड़ाई भी हम लड़ेंगे, लेकिन संवैधानिक तरीके से।
मैं भी जा रही हूं आंदोलन में : शील धाभाई
जयपुर की पूर्व महापौर शील धाभाई ने कहा कि अखिल भारतीय गुर्जर महासभा की महिला विंग ने बैसला के आंदोलन को समर्थन दिया है। मैं भी गुरुवार को आंदोलन में जा रही हूं। सरकार की ओर से दी गई राहत ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। इससे समाज में आक्रोश है। सरकार भर्तियां रोककर जल्दी इस मुद्दे का समाधान निकाले।
हम आंदोलन में बैसला के साथ : मानसिंह
गंगापुर सिटी के भाजपा नेता गंगापुरसिटी मानसिंह गुर्जर ने कहा कि इस आंदोलन में हम बैसला के साथ हैं। मुख्यमंत्री संवेदनशील होकर इसका हल है। बजट में जो छात्रवृत्ति की घोषणा की है, उसकी पात्रता को तुरंत बहाल करें। सरकार अस्थायी भर्तियां कर सकती हैं। हाईकोर्ट में पक्ष रखने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लेकर आए।

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