Saturday, February 20, 2010

आजादी की लड़ाई में भी आगे रहे गुर्जर

हिस्ट्री कान्फ्रेंस में समाज के इतिहासकारों ने गुर्जरों की देशभक्ति पर शोध पत्र पढ़े, अंतरराष्ट्रीय समुदाय बताया
जयपुर. एमडीएस यूनिवर्सिटी, अजमेर के पूर्व उपकुलपति मोहन लाल छीपा ने कहा कि गुर्जर एक जाति नहीं वरन अंतरराष्ट्रीय समुदाय है, जो भारत ही नहीं पाकिस्तान, अफगानिस्तान, जार्जिया, चेचन्या आद िदेशों में भी निवास करता है। वे यहां गुर्जरों की देशभक्ति और वर्तमान स्थिति पर आयोजित चतुर्थ गुर्जर हिस्ट्री कॉन्फ्रेंस में समाज के लोगों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि प्रतिहार वंश के प्रतापी सम्राट मिहिरभोज का विशाल साम्राज्य था और वे अरबों के सामने अजेय दीवार थे। विजयसिंह पथिक ने गांधीजी से पहले ही देश की आजादी के लिए लड़ाई में कूद पड़े थे। मुस्लिम गुर्जरों को भी देवनारायण संस्कृति से जोडऩे का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि समाज को आगे बढऩे के लिए महिला शिक्षा को विशेष महत्व देना होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे रामगोपाल ने समाज के लोगों से अपने इतिहास से प्रेरणा लेने को कहा। कॉन्फ्रेंस में डॉ. स्तेनिया सधेवाडिय़ा, केएसएन केशागा कॉलेज राजकोट, गुजरात प्राचार्यडॉ. अनसूइया बा चौधानी तथा वरुणवेश, चौधरी इशमसिंह चौहान, डॉ. पीडी गुर्जर, डॉ. कल्पा ए मानक, डॉ. सतूरिया नीता चंदूलाल, डॉ. पाटीदार मंजुला, डॉ. नीना जी पुरोहित, डॉ. दिलीप काठरिया, डॉ. पंकज पलवई, डॉ. चंद्र शेखर पाटिल, डॉ. प्रफुल्ल बेन, डॉ. हरिसिंह और प्रो. सत्येंद्र आर्य ने गुर्जरों की देशभक्ति पर शोध पत्र पढ़े।
इससे पूर्व मुख्य अतिथि छीपा ने भगवान देवनारायण की प्रतिमा के सामने दीप जलाकर हिस्ट्री कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन किया। डॉ. जयसिंह गुर्जर ने पिछले सेमिनार की समीक्षा की। इस मौके पर पुरुषोत्म फागणा, शौतानसिंह गुर्जर, महाराष्ट्र के पूर्व विधायक गुलाबराव पाटिल सहित समाज के अनेक वरिष्ठ लोग मौजूद थे। दामोदर गुर्जर एवं जीआर खटाणा ने इतिहासकारों का सम्मान किया। कार्यक्रम का संचालन मोहन लाल वर्मा व सत्येंद्र आर्य ने किया।

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