Thursday, May 03, 2012

गुर्जरों को चार महीने में 5% आरक्षण देने का वादा

जयपुर. सरकार ने विशेष पिछड़ा वर्ग में गुर्जरों को 5 प्रतिशत आरक्षण चार माह में देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात के बाद गुर्जर नेता कर्नल बैसला और सरकार के प्रतिनिधि ऊर्जा मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि गुर्जरों को अभी 1% आरक्षण दिया जा रहा है। शेष 4% अगले 4 महीने में ओबीसी कमीशन की सिफारिश के बाद दे दिया जाएगा। गुर्जरों का पिछड़ापन साबित करने के लिए विकास अध्ययन संस्थान (आईडीएस) की क्वांटिफाइड डाटा रिपोर्ट सरकार को मिल गई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने खुद यह आश्वासन दिया है।  इस आश्वासन के बाद बैसला बुधवार को जयपुर से लौट गए। 
बातचीत के बाद बैसला ने कहा कि मुख्यमंत्री ने 4 माह का जो समय मांगा है, वाजिब है। हम इसे अपनी ओर से सरकार के लिए आरक्षण लागू करने का अंतिम अवसर मान रहे हैं। 

एक सप्ताह में बनेगा ओबीसी आयोग

सरकार एक सप्ताह में ओबीसी आयोग का गठन कर देगी। इसमें हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश अध्यक्ष होंगे। तीन अन्य सदस्य होंगे। क्वांटिफाइड डाटा संबंधी रिपोर्ट मिलते ही आयोग करीब 84 जातियों की सुनवाई करेगा। इसमें लगभग ढाई माह लगेंगे। उसके बाद कैबिनेट की मुहर लगवाकर आरक्षण लागू कर दिया जाएगा। बैसला ने कहा कि इस बीच गांवों में जाकर आरक्षण के मुद्दे पर जनजागरण के लिए हमारी पंचायतों और सभाओं का दौर जारी रहेगा। गहलोत से बातचीत के दौरान ऊर्जा मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह, गुर्जर नेता ओम भड़ाना, पूर्व सरपंच टीकम चंद मौजूद थे।

ऊर्जा मंत्री के निवास पर धरना

 इससे पहले कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला ने कई गुर्जर प्रतिनिधियों के साथ बुधवार सुबह ऊर्जा मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह के निवास पर धरना दिया। इन प्रतिनिधियों ने उन्हें चेतावनी भी दी कि अगर उनका आरक्षण लागू नहीं हुआ तो डॉ. सिंह को भी घर में नहीं घुसने देंगे। इस पर सिंह ने सीएम हाउस जाकर मुख्यमंत्री से चर्चा की। बाद में कर्नल किरोड़ी बैसला की सीधी बात करवाई। ऊर्जा मंत्री के निवास पर धरना देने वालों में कैप्टन हरप्रसाद तंवर, कैप्टन भीम सिंह, कैप्टन जगराम, एडवोकेट अतर सिंह, डॉ. रूपसिंह, मांधातासिंह, अतरूप सिंह, भूरा भगत, हिम्मत सिंह, सरपंच कप्तानसिंह समेत कई छात्र और प्रमुख गुर्जर प्रतिनिधि मौजूद थे।

आपस में ही भिड़े गुर्जर प्रतिनिधि

ऊर्जा मंत्री के निवास पर गुर्जर प्रतिनिधि आपस में ही भिड़ गए। सरकारी आश्वासन पर असंतोष जताते हुए दौसा से आए हिम्मतसिंह ने कहा कि जब हाईकोर्ट ने फैसले में ही सरकार को 2 माह का समय दिया है तो फिर 4 माह किसलिए? सरकार कहीं गुर्जरों को फिर टालने का प्रयास तो नहीं कर रही है। बरसात के बाद गुर्जर खेती में व्यस्त हो जाएंगे। पहले भी सरकार ने क्वांटिफाइड डाटा जुटाने के लिए 3 माह का समय लिया था, 15 माह बाद भी कुछ नहीं किया। मुकदमों के बारे में कोई ठोस निर्णय नहीं हो रहा है, न ही समझौते के तहत पीडि़तों को मुआवजा दिया गया है। इस पर कैप्टन जगराम ने कहा कि जब बैसला और दो अन्य प्रतिनिधि सरकार से फैसले से सहमत हैं तो समय देना चाहिए। इस दौरान जगराम और हिम्मतसिंह में कहा-सुनी हुई। बाद में हिम्मतसिंह बैठक छोड़कर चले गए और गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया। डॉ. रूपसिंह ने भी आशंका जताई कि देवनारायण बोर्ड में अपेक्षाकृत काम नहीं हुआ है।

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