पूर्वजों का वादा निभाएंगे गुर्जर

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परंपरा के निर्वाह के लिए घूघरा के गुर्जरों ने बजौरी कांजरी के के वंशजों को दिए 51 हजार रुपए। बगड़ावतों ने किया था नौ करोड रुपए देने का वादा। आधी कीमत के गहने तो बगड़ावतों ने बजौरी को उसी वक्त पहना दिए। इसके बाद उससे कहा कि अब जा और दुनियां घूम, अगर कोई हमारी टक्क्र का कोई दान दाता मिल जाए तो तू पूरी गहनों से ढंक ही जाएगी, यदि ऐसा नहीं हुआ तो हमारे पास आना हम तुझे गहनों से लकदक कर देंगे। कहते हैं कि बजौरी पूरी दुनियां घूम आई लेकिन उसे बगड़ावतों की टक्कर का कोई दाता नहीं मिला। वह वापस बगड़ावतों के पास आई, लेकिन तब तक बगड़ावत राणा से हुई लड़ाई में मारे जा चुके थे। तब से बजौरी कांजरी ने गुर्जरों के अलावा और के लिए खेल करना बंद कर दिया। उसी परंपरा को उनके वंशज निभाते आ रहे हैं।
(ऐसा बुजुर्गवार बताते हैं)। 
भानूप्रताप गुर्जर ने इस पर एक अच्छी खबर की है। पढऩे के लिए इमेज पर क्लिक करें।
(source-http://patrika.com/epaper)

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