हमें तुम पर नाज है

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दूबली के गुर्जरों ने जान की बाजी लगाकर अपहृताओं से छात्रा को छुड़ाया, एक बदमाश को पकड़कर किया पुलिस के हवाले 
जयपुर. एक आदमी कुछ अच्छा करता है तो उससे पूरे समाज का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है। जब भी कहीं उसका जिक्र होता है तो लोग फक्र से कहते हैं कि यह हमारे समाज का है। ऐसा ही नाज करने वाला काम किया है तूंगा रोड पर स्थित गांव दूबली के गुर्जरों ने। उन्होंने न केवल अपहरण कर भाग रहे बदमाशों के चंगुल से छात्रा को मुक्त कराया बल्कि एक बदमाश को दबोचकर पुलिस के हवाले कर दिया।
घटना के अनुसार श्रीगंगानगर स्थित कॉलेज में होम्योपैथी के विद्यार्थी चूरू निवासी जितेंद्र गोदारा, सुनीता, जयपुर निवासी पिंकी, हनुमानगढ़ निवासी सुमित कक्कड़ और अलवर निवासी रोहित मीणा जयपुर निवासी एडवोकेट संदीप सैनी के साथ 7 अगस्त को जयपुर से किराए पर टवेरा लेकर इलाहाबाद घूमने गए थे। लौटत में 9 अगस्त को तड़के करीब 5 बजे करीब बांसखो फाटक के पास उन्होंने चाय पी, फिर जयपुर की ओर बढ़े। कुछ दूर चलने के बाद पीछे से तेजी में आई बोलेरो ने टवेरा को ओवरटेक कर रोक लिया। पांच बदमाशों ने सभी को गन पॉइंट पर लेकर मारपीट की और खेतों में पटक गए। दो बदमाश बोलेरों में ही रहे। वे टवेरा चालक करौली निवासी उदयराज मीणा को ले गए जिसे बाद में दौसा के पास छोड़ गए। सीकर जिले के थोई कस्बा निवासी हिस्ट्रीशीटर विक्रम मीणा सहित तीन बदमाश पिछली सीट पर बैठी विकलांग सुनीता को लेकर हाईवे से बांसखो फाटक होते हुए तूंगा रोड स्थित दूबली गांव की तरफ भागे। घुमाव पर टवेरा बेकाबू होकर सड़क किनारे गड्ढे में जा गिरी। इस दौरान सुनीता चिल्लाई तो ग्रामीणों ने बदमाशों का पीछा किया। घड़ी गांव की सरहद पर दुबली के घासीराम गुर्जर, जेपी गुर्जर, सोलाराम गुर्जर व रामू गुर्जर ने अन्य ग्रामीणों की मदद से विक्रम को दबोच लिया। उसके दो साथी गढ़ की पहाड़ी पर चढ़ गए। बाद में कानोता व बस्सी थाने की पुलिस भी वहां पहुंच गई। इस दौरान बदमाशों ने एएसआई पर फायर किया। दोपहर करीब 12 बजे बदमाशों के किसी गाड़ी में छिपकर कोटखावदा की तरफ भागने की सूचना मिली। कानोता थानाप्रभारी जितेंद्र सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम भेजी गई। देर रात तक दोनों बदमाशों की तूंगा व कोटखावदा में तलाश जारी थी। करौली, धौलपुर के एसपी को भी आरोपियों के बारे में सूचना दी गई है।
जैसे ही पता चला सब दौड़ पड़े
जानकारी के अनुसार दूबली के घासीराम गुर्जर घर पर बैठे थे, तभी गांव का एक युवक दौड़ा हुआ आया और उसने बताया कि कुछ बदमाश एक लड़की को पकड़ कर ले जा रहे हैं। वह बचाने के लिए चिल्ला रही है। यह सुनते ही घासीराम ने लकड़ी उठाई और अन्य युवाओं को आवाज लगाते हुए खेतों की ओर दौड़ पड़े। इसके साथ ही सब उनके पीछे हो लिए। गांव वालों को देखकर बदमाश हथियार दिखाते हुए भागने लगे, लेकिन जान की परवाह न करते हुए ग्रामीणों ने एक बदमाश को दबोच लिया। यह देख दो बदमाश छात्रा को छोड़कर पहाड़ी पर चढ़ गए।

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