'पुलिस ने हमें आतंकियों की तरह मारा'

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गुर्जर आंदोलन : पीपलखेड़ा पाटोली गोलीकांड के चश्मदीदों ने जांच आयोग के सामने दर्ज करवाए बयान 


जयपुर. पीपलखेड़ा पाटोली में 29 मई, 2007 को  गुर्जर आंदोलनकारियों पर हुई पुलिस गोलीबारी को याद कर चश्मदीद और पीडि़त आज भी सिहर उठते हैं। उस घटना में घायल राजेंद्र गुर्जर, पदमसिंह, मानसिंह, देवीलाल, जयाचंदा, मनभावन, जयराम और कमलेश ने सोमवार को बंसल जांच आयोग के सामने बयान दर्ज करवाए। पीडि़तों ने बताया कि पुलिस ने आंदोलनकारी गुर्जरों पर आतंकियों की तरह गोलियां बरसाईं। जो भी सामने दिखा उसे गोलियों से भून दिया गया। घायलों को उठाने गए तो पुलिस ने लाठियों से बुरी तरह पीटा। हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज एफसी बंसल की अध्यक्षता में गठित आयोग इस गोलीकांड और आंदोलन के दौरान हुई हिंसक घटनाओं की जांच कर रहा है।
एसपी ने मुझे गोली मार दी: करौली जिले के खोइली नादौती गांव के राजेंद्र गुर्जर ने बताया 'मैं साथियों के साथ 28 मई 2007 की शाम पीपलखेड़ा में रिश्तेदार के घर रुका था। पुलिस वाले रातभर से गांववालों को परेशान कर रहे थे। अगली सुबह 6:30 बजे मैं नित्यकर्म के लिए गया तो तत्कालीन दौसा एसपी ने मुझे गोली मार दी। मैं गिर गया। मुझे उठाने के लिए पदमसिंह और देवीलाल आए तो उनको भी पुलिसवालों ने बर्बरतापूर्वक लाठियों से मारा। देवीलाल के हाथ पैर में फ्रैक्चर हो गया। पदमसिंह का सिर फट गया और 18 टांके आए।  शाम को एसपी ने ग्रामीणों को धमकाया था कि ज्यादा करोगे तो गोली मारी दी जाएगी।'

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