गुर्जरों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश से उम्मीद बंधी

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सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अध्ययन करके हाईकोर्ट में देगी जवाब। विशेष आरक्षण का मामला अब पूरी तरह कोर्ट के आदेश पर निर्भर
जयपुर. तमिलनाडू और कर्नाटक में 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण कोटा एक साल तक और जारी रखने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अब राजस्थान के गुर्जर, रेबारी, बंजारा और गाडिया लुहारों को भी उम्मीद बंधी है। गुर्जर समाज ने इस फैसले के आधार पर हाईकोर्ट में उनकी पैरवी करने की मांग की है।
इधर, विधि विभाग के सूत्रों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रतिलिपि मंगाई जा रही है। इसका अध्ययन करने के बाद उसी आधार पर सरकार की ओर से हाईकोर्ट में गुर्जरों की पैरवी की जाएगी, ताकि उन्हें भी राहत मिल सके।
महाराष्ट्र से भी नहीं मिली राहत
महाराष्ट्र में लागू 52 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था से गुर्जरों को कोई राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर पिछले दिनों महाराष्ट्र पैटर्न का अध्ययन करके लौटी कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि महाराष्ट्र के आरक्षण को 15 साल में कभी कोर्ट में चुनौती ही नहीं दी गई, इसलिए वहां लागू है। राजस्थान में 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण को चुनौती दी जा चुकी है।
एसबीसी का 1 प्रतिशत आरक्षण भी नहीं मिला
गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के प्रवक्ता डॉ. रूपसिंह ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि गुर्जरों को विशेष पिछड़ा वर्ग के तहत दिए गए 1 प्रतिशत आरक्षण का लाभ भी नहीं मिला है। पत्र में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर हाईकोर्ट में पैरवी करने की मांग भी की गई है। अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के प्रवक्ता सुधीर बैसला ने भी विशेष पिछड़ा वर्ग का 5 प्रतिशत आरक्षण जल्दी लागू करने की मांग की है।

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