सिकंदरा में महापड़ाव फिल्हाल समाप्त, 13 मई को राष्ट्रीय महापंचायत

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तैयारियों में जुटने के कारण लिया फैसला, गुर्जर बोले-महापंचायत में तय की जाएगी आगे की रणनीति
(दौसा जिला). आरक्षण की मांग को लेकर सिकंदरा चौराहे पर 22 दिन से चला रहा गुर्जरों का महापड़ाव 13 मई को होने वाली राष्ट्रीय महापंचायत में आगे की रणनीति तय करने के फैसले के साथ शनिवार रात समाप्त हो गया। 
गौरतलब है कि कर्नल बैसला एवं सरकार के बीच हुए समझौते को मानने से इनकार करते हुए गुस्साए गुर्जरों ने महापड़ाव को 13 मई तक जारी रखने का एलान किया था। शनिवार को गुर्जर महापरिषद के राष्ट्रीय संयोजक रामवीरसिंह विधूडी, पूर्व विधायक गोपीचंद गुर्जर,  गुर्जर महापरिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमरावसिंह डोई, गुर्जर महासभा के जिलाध्यक्ष मनफूलसिंह, युवा गुर्जर महासभा के कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष मानसिंह बुर्जा, श्रवणसिंह सूबेदार, रामसिंह प्रभाकर सहित अन्य की मौजूदगी में देर रात 8 बजे तक चली बैठक में सर्वसम्मति से महापड़ाव समाप्त करने की घोषणा कर दी गई। गुर्जर नेताओं ने बताया कि समाज ने यह फैसला 13 मई को होने वाली महापंचायत की तैयारियों में व्यस्त रहने के कारण लिया है। आंदोलन की रणनीति होने जा रही महापंचायत में तय होगी।
ध्वज देवनारायण मंदिर कैलाई में : महापड़ाव समाप्त होने की घोषणा के बाद चौराहे पर लगे आंदोलन के ध्वज को गुर्जर देवनारायण भगवान मंदिर कैलाई ले गए, जहां रात को देवनारायण भगवान के जयघोषों के बीच मंदिर पर लगा दिया गया।
गुर्जरों के आरक्षण पर कैबिनेट की मुहर
एक प्रतिशत आरक्षण के आदेश जल्दी लागू होंगे, आर्थिक पिछड़ों के लिए भी रखे जाएंगे काल्पनिक पद सुरक्षित
जयपुर. राज्य मंत्रिमंडल ने गुरुवार को गुर्जरों के विशेष पिछड़ा वर्ग में एक प्रतिशत आरक्षण पर अपनी मुहर लगा दी। इस संबंध में जल्दी ही आदेश जारी कर दिए जाएंगे।
इसका लाभ उन्हीं अभ्यर्थियों को मिलेगा जो अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में चयनित नहीं हो पाएंगे। बाकी 4 प्रतिशत आरक्षण के संबंध में उनके लिए नोशनल (काल्पनिक) रूप से पद सुरक्षित रखे जाएंगे। इनके साथ ही आर्थिक पिछड़ा वर्ग के लिए भी 14 प्रतिशत पद नोशनल रूप से सुरक्षित रखे जाएंगे। ताकि हाईकोर्ट से आरक्षण कानून 2009 को लागू करने की अनुमति मिलने पर इन पदों पर भर्तियां की जा सकें। इससे पहले लिखित समझौते पर सचिवालय में गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला और प्रमुख गृह सचिव प्रदीप सेन गुप्ता ने सचिवालय में हस्ताक्षर किए। बैसला ने मीडिया से कहा कि वे  फैसले से संतुष्ट हैं और आंदोलन समाप्ति की घोषणा करते हैं। उन्होंने सिकंदरा में महापड़ाव पर बैठे लोगों से भी पड़ाव उठाने की अपील की। इसके बाद बैसला ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला ने मुलाकात भी की और उनका आभार व्यक्त किया।
नोशनल का मतलब क्या?
मुख्यमंत्री ने बताया कि यदि किसी विभाग में 100 वैकेंसी हैं तो वह 118 पदों के लिए भर्ती निकालेगा। उनमें से 100 पद भर लिए जाएंगे। बाकी 14 आर्थिक पिछड़ा वर्ग के और 4 विशेष पिछड़ा वर्ग के पदों की कार्मिक विभाग को सूचना दी जाएगी। यदि हाईकोर्ट से आरक्षण कानून की अनुमति मिल जाती है तो उन पदों पर भर्ती कर ली जाएगी। उन्होंने दोहराया कि पिछली सरकार ने गुर्जरों से समझौते में नहीं होते हुए भी आर्थिक पिछड़ों का 14 प्रतिशत आरक्षण विधेयक में जोड़ दिया। हाईकोर्ट में जाकर विधेयक अटक गया। इन्हें बैकलॉग नहीं माना जा सकता। बैकलॉग के पदों को उसी वर्ग के लोगों से भरना अनिवार्य हो जाता है, जबकि नोशनल पदों के बारे में ऐसा नहीं है। यदि हाईकोर्ट में आरक्षण अधिनियम 2008 निरस्त हो जाता है तो ये 18 प्रतिशत पदों की रिक्तियों को उस वर्ष की रिक्तियों में शामिल नहीं करके समाप्त मान लिया जाएगा।
सिकंदरा में बैसला का फैसला नामंजूर
(दौसा जिला). कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला द्वारा सरकार से किया गया समझौता सिकंदरा में 20 दिन से महापड़ाव डालकर बैठे गुर्जरों को स्वीकार नहीं है। गुरुवार दोपहर गुर्जर महापरिषद के राष्ट्रीय संयोजक रामवीर विधूडी ने सिकंदरा में आंदोलन को जारी रखने की घोषणा करते हुए शुक्रवार शाम 4 बजे सिकंदरा में महापंचायत का एलान किया है। इसमें आंदोलन की आगामी रणनीति की घोषणा की जाएगी। उन्होंने सरकार के सामने पांच मांगें रखी हैं। इससे पहले गुर्जरों ने बांदीकुई रोड पर अवरोधक लगाकर रास्ता बंद कर दिया। उधर, आभानेरी में हाईवे के वैकल्पिक मार्ग और भांडेड़ा रोड को जाम कर दिया।  सिकंदरा गांव के बाजार बंद करवाकर पुलिस थाने के सामने पड़े कबाड व बेरिकेड्स को डालकर रास्ता अवरूद्ध किया। कुछ देर बाद ही समाज के लोगों ने समझाकर रास्ता खुलवाया। महापड़ाव स्थल पर विधूडी ने समाज के लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि कर्नल बैसला व सरकार के  बीच हुआ समझौता  समाज के साथ धोखा है। इसे समाज स्वीकार नहीं करेगा। आंदोलन का हैडक्वार्टर सिकंदरा था तो समझौते से पहले यहां के पंच-पटेलों से राय लेनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि अब समाज कर्नल से नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री से वार्ता करेगा।
विधूडी ने रखी ये मांगें
 विधूडी ने सरकार के सामने पांच मांगें रखी हैं। इनमें 50 प्रतिशत के अंदर गुर्जरों को 5 प्रतिशत आरक्षण, जेलों में बंद समाज के लोगों को रिहा करने, समाज के लोगों पर लगे मुकदमे वापस लेने, आंदोलन में घायल हुए समाज के लोगों को प्रतिमाह  10 हजार रु. पेंशन स्वीकृत करने तथा देवनारायण बोर्ड का बजट 500 करोड़ रु. किया जाना शामिल है।
अब आरक्षण
एससी     16'
एसटी     12'
ओबीसी     21'
(गुर्जर और अन्य तीन जातियां शामिल हैं)
एसबीसी     01'  (गुर्जर एवं अन्य)
सामान्य वर्ग     50'
१८' पद कल्पनातीत
18' पद नोशनल होंगे। इनमें 14' आर्थिक पिछड़ों व 4' पद गुर्जरों व अन्य के लिए। हाई कोर्ट 68' आरक्षण को हरी झंडी देता है तो ये 18' पद भरे जाएंगे, वर्ना समाप्त हो जाएंगे।
हाईकोर्ट में पैरवी करें, सरकार सहयोग करेगी : सीएम
कैबिनेट की बैठक के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि लगातार संवाद और सरकार की सकारात्मक सोच से ही इस समस्या का शांतिपूर्ण समाधान हुआ है। उन्होंने कहा कि अब विशेष पिछड़ा वर्ग और आर्थिक पिछड़ा वर्ग को हाईकोर्ट में अपनी ओर से पैरवी करनी चाहिए। सरकार भी उनका भरपूर सहयोग करेगी। हाईकोर्ट का फैसला आने तक यदि आर्थिक पिछड़ा वर्ग और विशेष पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थी के ओवरएज होने पर आयु सीमा में छूट दी जाएगी।
१% आरक्षण अभी से, ४% का बैकलॉग
जयपुर/भरतपुर . प्रदेश के आंदोलनकारी गुर्जरों और सरकार में आखिरकार आरक्षण मामले में समझौता हो गया। इसके अनुसार गुर्जरों को 1 प्रतिशत आरक्षण तो तुरंत मिलेगा, जबकि बाकी 4 प्रतिशत का बैकलॉग रखा जाएगा। सरकार से हुए इस लिखित समझौते के बाद आंदोलन की अगुवाई कर रहे कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला ने बुधवार को मदनपुर में आंदोलन को समाप्त करने की घोषणा कर दी। इससे पहले बैसला ने महापंचायत में सरकार से हुए लिखित समझौते को पढ़कर सुनाया। गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के सदस्य एडवोकेट अतरसिंह ने बताया कि प्रदेश में जहां-जहां भी पड़ाव चल रहे हैं वे समाप्त कर दिए जाएंगे।
यह हुआ लिखित समझौता
गुर्जरों को 50' में बचा हुआ 1' आरक्षण एसबीसी के तहत तुरंत मिलेगा। बाकी 4' आरक्षण के बारे में कोर्ट से फैसला होने तक बैकलॉग रखा जाएगा। तब तक गुर्जर यदि चाहें तो (ओबीसी) में आरक्षण का लाभ ले सकेंगे। कोर्ट का स्टे हटने के बाद तुरंत भर्ती की जाएगी।
5' आरक्षण के संबंध में कोर्ट से जल्द फैसला करवाने का प्रयत्न होगा।
इस बीच आयु सीमा पार करने वाले अभ्यर्थियों को आयु सीमा में छूट भी दी जाएगी।
50% में  5% पर असमंजस
सरकारी सूत्रों का कहना है कि यदि हाईकोर्ट आदेश दे देता है कि कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं दिया जा सकता तो गुर्जरों को एसबीसी में केवल 1 प्रतिशत आरक्षण ही मिलेगा। हालांकि वे ओबीसी के 21 प्रतिशत  में भी लाभ ले सकेंगे। लेकिन 4 प्रतिशत आरक्षण अलग नहीं किया जाएगा।
...यह भी हो सकता है
यदि हाईकोर्ट विशेष परिस्थितियों में ही 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण को मंजूरी दे देता है तो महाराष्ट्र पैटर्न को अपनाते हुए सरकार पिछड़ा वर्ग का आरक्षण 21 प्रतिशत से बढ़ाकर उसमें से गुर्जरों, रैबारी, गाडिय़ा लुहार, बंजारा आदि को विशेष पिछड़ा वर्ग के तहत 5 प्रतिशत आरक्षण दे सकती है।

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