बात हुई, पर बनी नहीं

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10 गुर्जर नेताओं के साथ मंत्रियों की कमेटी ने की बातचीत, नतीजा नहीं निकला, आज फिर हो सकती है वार्ता, बैसला के आने की उम्मीद
(जयपुर). सरकारी नौकरियों में पांच प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे गुर्जर नेताओं के साथ शुक्रवार शाम विधानसभा परिसर में हुई वार्ता बेनतीजा रही। इस बातचीत से संवादहीनता तो टूटी, लेकिन किसी बिंदु पर सहमति नहीं बनी। हालांकि सरकार और गुर्जर नेताओं ने बातचीत को सकारात्मक बताया है। इस बीच जयपुर कूच की तैयारी में जुटे गुर्जर अपने-अपने इलाकों में पड़ाव के रूप में जुटे हुए हैं। वार्र्ता के लिए आए गुर्जर नेताओं में कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला और उनके सहयोगी कैप्टन हरप्रसाद शामिल नहीं हैं। वार्ताकारों ने संकेत दिए कि वार्ता का अगला दौर शनिवार को होने की संभावना है। करौली कलेक्टर नीरज के. पवन शुक्रवार रात बैसला को लेने हिंडौन पहुंच गए हैं। संभवत: शनिवार को वार्ता में बैसला शरीक होंगे।
करीब दो घंटे चली वार्ता में गुर्जर नेताओं ने पांच मांगें रखीं और उन्हें मनवाने के लिए जोर दिया। सरकारी प्रतिनिधियों ने इन पर सहानुभूति पूर्वक विचार का भरोसा दिलाया। शिष्टमंडल का नेतृत्व कर रहे दौसा गुर्जर समाज के अध्यक्ष मनफूल सिंह और दिल्ली के सतपाल ने बाद में बताया कि वार्ता शांतिपूर्वक और सकारात्मक रही है।
सरकार की ओर वार्ता में परिवहन मंत्री ब्रजकिशोर शर्मा और ऊर्जा मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह शामिल हुए। दोनों ने दावा किया कि वार्ता को बेनतीजा नहीं कह सकते, क्योंकि अभी बातचीत के और दौर होंगे। उन्होंने कहा कि गुर्जरों का पक्ष मुख्यमंत्री तक पहुंचाएंगे। वार्ता के बाद दोनों मंत्री मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को जानकारी देेने के लिए मुख्यमंत्री निवास भी गए। बातचीत के लिए गठित कमेटी के अध्यक्ष गृहमंत्री शांति धारीवाल वार्ता में शामिल नहीं थे। गुर्जर शिष्टमंडल में दौसा के मनफूलसिंह गुर्जर, गजेंद्र खटाना, पावटा के टीकमसिंह, गंगापुर के शिवलाल, बयाना के भूरा भगत, अजमेर के रामस्वरूप, हरिराम अजाड़, टोंक के राजेंद्र गुर्जर, अलवर के लीलाधर और दिल्ली के सतपाल भी थे।
इसलिए नहीं बनी बात
गुर्जर प्रतिनिधि 5 प्रतिशत आरक्षण सहित पांच प्रमुख मांगों पर अड़े थे। अभी यह निर्धन सवर्णों के 14 प्रतिशत आरक्षण के साथ जोड़कर दिया गया है। सरकार और गुर्जर प्रतिनिधि इस बात पर सहमत थे कि गुर्जरों सहित रेबारी, गाडिय़ा लुहार व बंजारा जातियों का 5 प्रतिशत आरक्षण अलग से हो। एक नया मोड़ यह आ गया कि गुर्जरों ने इस 5 प्रतिशत में आधा आरक्षण अपने लिए मांग लिया।
फिलहाल जयपुर कूच स्थगित : कैप्टन
कर्नल बैसला के प्रमुख सहयोगी कैप्टन हरप्रसाद ने बताया कि सरकार के वार्ता होने तक जयपुर कूच स्थगित रहेगा। उन्होंने बताया कि गुर्जरों का महापड़ाव जहां जहां हैं, वहीं पर रहेंगे। वार्ता विफल रहने की दशा में ही कूच होगा। गुर्जरों के आंदोलन को देखते हुए पुलिस ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है। इसके लिए अन्य जिलों से भारी पुलिस बल बुलाया गया है। इसके साथ ही टोंक, दौसा, जयपुर और अजमेर जिलों में निषेधाज्ञा लगा दी गई है।
क्या हैं प्रमुख मांगें
पांच मांगों में 5 प्रतिशत विशेष पिछड़ा श्रेणी में आरक्षण, इस पांच प्रतिशत में से गुर्जरों को 50 फीसदी, पिछले आंदोलनों में मारे गए व घायलों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने, आरक्षण का मसला नहीं सुलझने तक सरकारी नौकरियों में भर्ती पर रोक, मुकदमे वापस लेने और जेलों में बंद लोगों को रिहा करना प्रमुख हंै।
प्रदेश में कई जगह पड़ाव
अजमेर में संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश भडाणा के नेतृत्व में लाडपुरा के खेतों में सैकड़ों लोग पड़ाव डाले हुए हैं। आंदोलनकारियों ने कहा है कि 24 घंटे में मांगें नहीं मानी गईं, तो जयपुर कूच करेंगे। टोंक में बनास नदी के किनारे भूणाजी महाराज मंदिर पर गुर्जरों ने महापड़ाव डाल रखा है। जोधपुर में भी भगत की कोठी स्थित देवनारायण मंदिर से कलेक्ट्रेट तक आरक्षण के लिए रैली निकाली गई।
अजमेर में वाहनों का रास्ता बदला पुलिस ने
अजमेर में लाडपुरा के पास महापड़ाव शुरू होते ही पुलिस ने जयपुर से अजमेर होते हुए जोधपुर, पाली, सिरोही और जालोर की ओर जाने वाले वाहनों को किशनगढ़ नसीराबाद फोर लेन हाईवे के जरिए चलाया। ब्यावर से जयपुर जाने वाले वाहनों को किशनगढ़ फोर लेन हाईवे से भेजा गया। किशनगढ़ से अजमेर आने वाले वाहनों को किशनगढ़ से मदार होते हुए शहर में प्रवेश दिया जा रहा है। महापड़ाव के आसपास की दुकानों, रेस्टोरेंट और ढाबों को बंद करवा दिया गया है। नेशनल हाईवे और दिल्ली मुंबई रेलवे ट्रेक की सुरक्षा पर विशेष ध्यान रखा जा रहा है। महापड़ाव के लिए प्रशासन से मंजूरी नहीं लेने के लेकर प्रशासन काफी गंभीरता से ले रहा है। कलेक्टर ने बिना स्वीकृति महापड़ाव डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है।
आरक्षण को भाजपा ने उलझाया : गहलोत
आरक्षण मसले को भाजपा ने उलझाया। उसने 5' आरक्षण की विशेष कैटेगरी बनाकर उसे 14' आरक्षण से जोड़ दिया। उसे मालूम था कि इस पर हाईकोर्ट में स्टे होगा। न्यायालय का सम्मान करना हर नागरिक का फर्ज है। भाजपा के शासन में 21 बार फायरिंग हुई। 90 लोग मारे गए। भाजपा के कुछ नेताओं को तो 15 महीनों से लग रहा है कि राज्य में शांति, भाईचारा क्यों है? वे सोचते हैं कि फायरिंग हो जाती तो हम इक्वल फुटिंग पर आ जाते। वो हम नहीं होने देंगे।
अशोक गहलोत, मुख्यमंत्री
जो आरक्षण दे, मैं उसका थैला थाम लूंगा : बैसला
हम 5' आरक्षण से कम पर कोई समझौता नहीं करेंगे। यही समाज का आखिरी फैसला है। यह कैसे मिले, इसकी गुत्थी सरकार को सुलझानी है, हमें नहीं। सरकार के नुमाइंदे हमें गुमराह न करें और न कोई चालाकी बरतें। सरकार को चाहिए कि वे देरी किए बिना न्यायपूर्ण हक दिलाएं। अब गुर्जर समाज में बाड़ ही खेत को खाने लगी है। सरकार तो क्या, कोई भी गुर्जर समाज को पांच प्रतिशत आरक्षण दिलाए तो मैं उसका थैला पकडऩे को तैयार हूं।
कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला, महापड़ाव स्थल गाजीपुर से
(दैनिक भास्कर से साभार)

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