हाईकोर्ट ने प्रमुख गृह सचिव से हलफनामा मांगा

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गुर्जर आरक्षण आंदोलन में अदालती आदेश की अवमानना का मामला, अदालत में पेश हुए किरोड़ी सिंह बैंसला
जयपुर.  हाईकोर्ट ने 2008 में गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान अदालती आदेश की अवमानना के मामले में प्रमुख गृह सचिव को निर्देश दिया है कि वे 28 नवंबर को हलफनामा पेश कर बताएं कि उन्होंने 10 सितंबर 07 के आदेश के पालन में क्या कदम उठाए। साथ ही कहा कि यदि न्यायालय सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से संतुष्ट नहीं होता है तो उस स्थिति में न्यायालय द्वारा अपने विवेक के आधार पर आदेश पारित कर दिया जाएगा।
 न्यायाधीश महेश चन्द्र शर्मा ने यह अंतरिम आदेश बुधवार को तत्कालीन विशेष गृह सचिव की अवमानना याचिका पर दिया। न्यायाधीश ने प्रमुख गृह सचिव व बैंसला को निर्देश दिया कि आगामी सुनवाई पर वे भी मौजूद रहें।  सुनवाई के दौरान बैंसला अदालत में पेश हुए और उनके वकील ने कहा कि उन्होंने आदेश का उल्लंघन नहीं किया है। जवाब में सरकार की ओर से दलील दी कि उन्होंने अदालती आदेश का उल्लंघन किया है। इस पर न्यायाधीश ने सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता एन.ए.नकवी से पूछा कि सरकार ने अवमानना याचिका दायर की है, जबकि अदालती आदेश का उल्लंघन सरकार ने ही किया है, लिहाजा अवमानना का मामला तो सरकार के खिलाफ ही बनता है। ऐसे में अवमानना के लिए जितने जिम्मेदार किरोड़ी सिंह बैंसला हैं उतनी ही सरकार भी है। सुनवाई के दौरान दौसा जिला कलेक्टर व एसपी का शपथ पत्र पेश किया। इस पर न्यायाधीश ने प्रमुख गृह सचिव को निर्देश दिया कि वे आंदोलन के दौरान सितंबर 07 के आदेश के पालन में सरकार द्वारा की गई कार्रवाई शपथ पत्र पेश कर बताएं।
 यह था आदेश
हाई कोर्ट ने 10 सितंबर 07 को सरकार को निर्देश दिया था कि वह आंदोलन के दौरान नागरिकों के मूलभूत अधिकारों के संरक्षण, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सार्वजनिक व निजी संपत्ति की क्षति रोकने की व्यवस्था करे। साथ ही वह गुर्जर समुदाय के दबाव में केन्द्र सरकार से इन्हें जनजाति में शामिल करने के संबंध में कोई सिफारिश न करे।

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