गुर्जर आंदोलन से कितना आर्थिक नुकसान हुआ?

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जयपुर. हाई कोर्ट ने गुर्जर आरक्षण आंदोलन (2008) के दौरान अदालत की अवमानना के मामले में प्रमुख गृह सचिव जीएस संधू को विस्तृत शपथ-पत्र में यह बताने का निर्देश दिया है कि अदालत के 10 सितंबर 07 के आदेश के बाद अवमाननाकर्ताओं द्वारा प्रदेश के किन-किन जिलों में हिंसा की गई और कितनी हानि हुई।
साथ ही इस आंदोलन से राज्य को कितना आर्थिक नुकसान हुआ, उस दौरान कितने मामले दर्ज हुए, कितनों में चालान पेश हुए, कितनों में एफआर लगी और कितने सरकार ने वापस लिए। मामले की अगली सुनवाई20 जनवरी को होगी।
न्यायाधीश महेश चन्द्र शर्मा ने यह अंतरिम आदेश तत्कालीन विशेष गृह सचिव की अवमानना याचिका पर सोमवार को दिया। अदालत ने यह भी कहा कि आंदोलनकारियों द्वारा भांडारेज कस्बे में हाल में किए आंदोलन के संबंध में सरकार से जो अनुमति मांगी थी, उसका मंजूरी पत्र अदालत में पेश करें और बताएं कि आंदोलनकारियों ने उस पत्र के अनुसार धरना दिया था या नहीं। शपथ पत्र में यह भी बताया जाए कि समय-समय पर हुए आंदोलनों के दौरान उन्होंने 10 सितंबर 07 के आदेश के पालन में क्या कार्रवाई की।
अदालत के पिछले आदेश के पालन में संधू सहित संबंधित जिला कलेक्टरों व एसपी के शपथ-पत्र पेश किए गए। राज्य सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता ने बताया कि आंदोलन के दौरान 609 मामले दर्ज हुए, 224 में चालान पेश हुआ, 172 में एफआर लगी, 156 वापस लिए गए, लेकिन अदालत इससे संतुष्ट नहीं हुई और संधू को विस्तृत शपथ-पत्र पेश करने को कहा।
सुनवाई के दौरान गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला पेश नहीं हुए। उनके वकील ने कहा कि वे बीमार हैं, इस पर अदालत ने बैंसला को आगामी सुनवाई पर उपस्थित रहने का निर्देश दिया।
(Source: http://www.bhaskar.com/)

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