गुर्जर नेताओं ने बैसला पर छोड़ा फैसला

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जयपुर. गुर्जरों को पांच प्रतिशत आरक्षण सहित 13 सूत्री समझौते की पालना की मियाद पूरी होने के बाद आंदोलन की चेतावनी दे चुके गुर्जर नेताओं की शनिवार को सरकार से वार्ता हुई। इसमें दोनों पक्षों में कोई सहमति नहीं बन सकी। वार्ता के बाद गुर्जर नेताओं ने आगे की रणनीति पर फैसला कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला पर छोड़ दिया।
कर्नल बैसला ही अब वार्ता के बाद आंदोलन करने या सरकार को समय देने पर फैसला करेंगे। गुर्जर नेताओं के 51 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को सचिवालय में मंत्रिमंडलीय उपसमिति और अधिकारियों के साथ साढ़े चार घंटे वार्ता की। वार्ता के बाद गुर्जर नेताओं के एक धड़े ने आरक्षण के लिए होने वाले सर्वे, मुकदमे वापसी, देवनारायण बोर्ड बनाने सहित सरकार के साथ जनवरी में हुए 13 सूत्री समझौते पर अब तक की प्रगति को संतोषजनक बताया।
वहीं दूसरे धड़े के नेताओं ने इसे निराशाजनक बताते हुए असंतोष जाहिर किया। बैठक के बाद हालांकि प्रतिनिधिमंडल में शामिल सभी नेताओं ने एक सुर में आगे की रणनीति का फैसला कर्नल बैंसला पर छोड़ने की घोषणा की। बैठक में गुर्जर समझौते पर बनी उपसमिति के गृह मंत्री शांति धारीवाल, ऊर्जा मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ मुख्य सचिव एस.अहमद, एसीएस गृह पीके देब,डीजीपी हरीश मीना सहित करीब 12 प्रमुख विभागों के प्रमुख सचिव मौजूद थे।
सरकार का दावा, वार्ता सकारात्मक गुर्जर संतुष्ट

 बैठक के बाद सरकार की ओर से वार्ता सकारात्मक और गुर्जर नेताओं के अब तक की प्रगति से से संतुष्ट होने का दावा किया गया। बैठक के बाद गृह मंत्री शांति धारीवाल ने बताया कि जिन 12 बिंदुओं पर 4 जनवरी को समझौता हुआ था उस पर अब तक की प्रगति से गुर्जर नेता संतुष्ट हैं। हाईकोर्ट के आदेशों के अनुसार क्वांटिफाइड डाटा सर्वे का काम सरकार ने आईडीएस को दिया है।आईडीएस ने 2 जिलों में सर्वे पूरा कर लिया है और 2 जिलों में यह चल रहा है, संस्था 30 नवंबर तक सर्वे का यह काम पूरा कर लेगी। इस बात पर गुर्जर नेता भी संतुष्ट हैं।


सर्वे में देरी से नाराजगी: डॉ. जितेंद्र
ऊर्जा मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि गुर्जर नेताओं में क्वांटिफाइड डाटा सर्वे में हुई देरी पर नाराजगी जरूर है लेकिन यह काम समय पर पूरा कर लिया जाएगा। नौकरियों में 1 प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं मिलने का मुद्दे पर यह तय हुआ है कि सभी भर्तियां जिला स्तर की बजाय प्रदेश स्तर पर निकाली जाएं। मुकदमे वापसी सहित अन्य मांगों पर गुर्जर नेता संतुष्ट हैं।
वार्ता में नहीं आए बैंसला 

कर्नल बैंसला जयपुर आने के बावजूद सरकार से वार्ता के लिए नहीं आए। हालांकि गुर्जर प्रतिनिधियों और सरकार के अनुसार बैंसला की अचानक तबियत खराब होने के कारण वे वाता में शामिल नहीं हुए। बैंसला दोपहर करीब 11 बजे हिंडौन से जयपुर के लिए निकल चुके थे लेकिन एन वक्त पर उन्होंने फैसला बदल दिया।
इनका कहना है

समझौते पर अब तक हुई कार्रवाई से हम 90 प्रतिशत संतुष्ट हैं, लेकिन समाज की मुख्य मांग 5 प्रतिशत आरक्षण को लागू करना है। सर्वे पूरा होने की मियाद पूरी होने के बाद समाज को लगा कि कहीं इसमें धोखा नहीं हो जाए। सरकार से वार्ता के बाद अब ओ का फैसला कर्नल करेंगे। 
- रूप सिंह, प्रवक्ता, गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति

6 महीने में समझौते की पालना में हुई कार्रवाई से हम पूरी तरह असंतुष्ट हैं। मुकदमे वापसी पर हुई कार्रवाई से समाज संतुष्ट नहीं है, अब आगे का फैसला कर्नल बैंसला करेंगे। 

कैप्टन हरप्रसाद तंवर, गुर्जर नेता
(दैनिक भास्कर से साभार)

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