आंखो की रोशनी नहीं, बुलंद हौसलों से की हर मुश्किल आसान

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 हर्ष खटाना
 जयपुर. महज पांच की उम्र में हादसे ने उनकी किस्मत में अंधेरा लिख दिया था। लेकिन हालात को कोसने की बजाय उन्होंने किस्मत की तहरीर खुद लिखने की ठानी। हजार मुश्किलें भी आईं। मन में बसा मेहनत का नूर राहें रोशन करता गया और मुश्किलें खुद-ब-खुद मिटती गईं। यह दास्तां है पंजाब नेशनल बैंक की आईटी विभाग के मैनेजर दिनेश गुर्जर की। 40 साल के दिनेश को भले ही आंखों से दिखाई नहीं देता, लेकिन उनके काम में दृष्टिहीनता कभी आड़े नहीं आई। वे जयपुर सहित दस जिलों की कम्प्यूटराइज्ड बैंकिंग का प्रभार बखूबी संभाल रहे हैं। गुरुवार को जब शहर के प्रमुख बैंकों के एटीएम बंद हो गए, तब दिनेश ने मिनटों में सर्वर में आई खराबी को दूर कर दिया। उनका काम ही उनका परिचय बन गया है।
बचपन में चली गई आंखों की रोशनी
पांच साल की उम्र में एक हादसे में दिनेश की आंखों की रोशनी चली गई। नौ साल के हुए थे कि पिता का साया उठ गया। तंगी में अजमेर के दृष्टिहीनों के स्कूल में पढ़ाई की। वर्ष 1977 में, जब ब्रेल लिपि दृष्टिहीनों के स्कूलों तक नहीं पहुंची थी, मेहनती दिनेश ने सामान्य छात्रों की तरह परीक्षा दी और राजस्थान में 66वां स्थान हासिल किया। फिर 11वीं में 20वीं रैंक आई। आर्थिक तंगी के चलते पढ़ाई छोड़नी पड़ी। 1988 में पीएनबी में स्टेनोग्राफर के रूप में देहरादून पोस्टिंग मिली। इसी के साथ पढ़ाई का सिलसिला फिर शुरू किया। स्नातक के बाद बैंकिंग से जुड़े कोर्सेज किए। दिनेश को 1997 में नेशनल अवार्ड ऑफ बेस्ट एम्पलाई मिला, जो राष्ट्रपति के.आर. नारायणन ने उन्हें प्रदान किया।
बैंक में मांगा सबसे मुश्किल काम
पीएनबी में वर्ष 2000 तक नियम था कि क्लर्क स्टाफ में तैनात दृष्टिहीन कर्मचारी बैंक अधिकारी पद के लिए आवेदन नहीं कर सकते। दिनेश कोर्ट गए और बिना आरक्षण परीक्षा में बैठने की अनुमति पा ली। लिखित परीक्षा पास की, इंटरव्यू में पूछा गया- तुम दृष्टिहीन हो, क्या काम करोगे? दिनेश ने बैंक का सबसे कठिन काम मांगा। तब पीएनबी में कम्प्यूटराइजेशन का काम चल रहा था। दिनेश को आईटी शाखा में नियुक्त किया। बोलने वाले सॉफ्टवेयर एक्सेस स्पीच की मदद से दिनेश कम्प्यूटर पर आम आदमी की तरह काम करता है। विदेशी आईटी एक्सपर्ट्स ने ट्रेनिंग दी और एक सहयोगी की मदद से दिनेश ने सब मुमकिन कर दिखाया।
इनके लिए असंभव कुछ भी नहीं
जयपुर, दौसा, हाड़ोती क्षेत्र सहित दस जिलों की 80 से ज्यादा बैंक शाखाओं की कप्प्यूटर तकनीकी का काम संभाल रहे हैं। 100 एटीएम की डे-टू-डे टेक्निकल मॉनीटरिंग। रोज दर्जनों शिकायतों का ऑनलाइन समाधान करते हैं। इंटरनेट बैकिंग एक्टीवेशन फीचर्स सहित सारे कामकाज संभाल रहे हैं। डेबिट और क्रेडिट काडरें का स्टॉक, सप्लाई, एक्टीवेशन, कार्ड कोड आदि का समाधान। सैकडों फोन नंबर रटे हुए हैं। एक मुलाकात में किसी की आवाज सुन लें तो कभी भी उसे पहचान जाते हैं। ऑफिस और घर में कौनसी चीज कहां और किस तरीके से रखी है, पता रहता है। सामने वाले व्यक्ति की आवाज सुनकर आंखों में आंखें डालकर बात करते हैं। इससे कई बार तो ऐसा लगता है कि वे दृष्टिहीन नहीं हैं।
दैनिक भास्कर से साभार

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