25 मार्च तक हमारे हक का फैसला नहीं तो आंदोलन

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आरक्षण संघर्ष समिति ने दिया अल्टीमेटम,   26 मार्च को पुष्कर में फिर बुलाई महापंचायत

(अजमेर जिला). पुष्कर में ब्रह्मा मंदिर के पीछे गुर्जर समाज के प्रस्तावित छात्रावास स्थल पर हुई गुर्जर महापंचायत में  गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने हाईकोर्ट का फैसला आने तक नई भर्तियों पर रोक और गुर्जर व चार अन्य जातियों को पांच प्रतिशत विशेष आरक्षण की मांग को लेकर सरकार को 26 मार्च तक का अल्टीमेटम दिया है। साथ ही इसी दिन पुष्कर में महापंचायत का एलान भी किया है।
समिति संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला ने कहा कि सरकार 25 मार्च तक उनके हक में फैसला कर दे, वर्ना वे पुष्कर से आंदोलन की शुरूआत करेंगे। बैसला ने अजमेर जिले को डेढ लाख तथा जोधपुर, जालौर, बाड़मेर व पाली को एक-एक लाख की भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी। रैबारी समाज से उन्होंने 25 हजार ऊंटों को पुष्कर लाने का आह्वान किया। 
डॉ. रूपसिंह व कैप्टन हरप्रसाद ने कहा कि अब गुर्जर पांच प्रतिशत आरक्षण के साथ ही एसटी के दर्जा भी हासिल करके रहेंगे। पूर्व आयकर आयुक्त बीडी गुर्जर ने आंदोलन में अति गरीब जातियों को जोडऩे की वकालत की। इससे पूर्व जिला अध्यक्ष व संभाग प्रभारी औमप्रकाश भडाणा ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। महापंचायत को तिलोक वकील, खातौली के सरपंच गोपाल बागड़ी, अजमेर के सुदामा शर्मा, भीलवाड़ा के दूदाराम, लेबर यूनियन पाली के अध्यक्ष बुद्धाराम, करौली के फतेहसिंह, अखिल भारतीय रायका समाज के प्रवक्ता नागौर के अम्बालाल रायका, सवाईमाधोपुर के गिर्राज गुर्जर, सरपंच गायडऱाम देवासी, कोटपुतली के विकास , उदयपुर डांगी समाज के गहरीलाल, मोतीलाल, भंवर गुर्जर, गुर्जर समाज की नेत्री अलका गुर्जर, बंजारा समाज के महेन्द्रसिंह बंजारा, रूपनगढ़ के मूलचंद डांगी, उदयसिंह बैंसला सहित अनेक वक्ताओं ने संबोधित किया।
भाषण नहीं दे पाए पूर्व पंचायतीराज मंत्री
पूर्व पंचायती राज मंत्री कालूलाल गुर्जर को महापंचायत में बिना भाषण दिए मंच से लौटना पड़ा।  वे जैसे ही भाषण देने के लिए माइक पर आए कुछ युवा उन पर उनके मंत्री पद पर रहने के दौरान हुए गुर्जर आंदोलन में चुप रहने का आरोप लगाते हुए मंच पर चढ़ गए और खरी-खोटी सुनाने लगे। माहौल बिगड़ता देख बैसला हस्तक्षेप कर मामला संभाला। उसके बाद पूर्व मंत्री बिना भाषण दिए मंच पर बैठ गए। 
बस इतना कह सकता हूं, आंदोलन में हिंसा नहीं होगी
सरकार ने मांग नहीं मानी तो 26 मार्च के बाद आंदोलन तेज होगा।  सरकार आरक्षण के मसले पर धोखा दे रही है। 26 मार्च तक उनके पक्ष में फैसला नहीं किए जाने पर पुष्कर की महापंचायत में फैसला होगा। पुष्कर से कहां के लिए कूच करेंगे और आंदोलन का स्वरूप क्या होगा यह तो अभी तय नहीं लेकिन यह जरूर है कि आंदोलन में हिंसा नहीं होगी।

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