Monday, January 11, 2010

...तो फिर से सिकंदरा और पीलूपुरा जैसे आंदोलन : बैसला

गुर्जरों को विशेष आरक्षण लाभ दिए जाने से पहले नई भर्तियां शुरू किए जाने के निर्णय से समाज में आक्रोश
(दौसा जिला). गुर्जर आरक्षण आंदोलन के अगुवा कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला ने कहा कि सरकार ने पुरानी प्रक्रिया के तहत भर्ती की तो फिर से सिकंदरा व पीलूपुरा जैसे आंदोलन करने को मजबूर होना पड़ सकता है। हम पहले प्रजातांत्रिक तरीके से अपनी बात रखेंगे। बात नहीं बनी तो आंदोलन का रूख अपनाना पड़ेगा। आरक्षण का हक गुर्जर लेकर रहेंगे। बैसला ने रविवार को पत्रकार वार्ता में कहा कि अन्य राज्यों में 65 प्रतिशत तक आरक्षण दिया जा रहा है। इसी के अनुरूप राजस्थान में भी गुर्जरों को आरक्षण दिया जाना चाहिए।
...तो बर्दाश्त नहीं करेंगे : हिम्मत सिंह
राजस्थान गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति सदस्य हिम्मत सिंह गुर्जर ने कहा कि सरकार ने गुर्जर समाज की अनदेखी कर नई भर्तियां शुरू की, तो बर्दाश्त नहीं करेंगे। मुख्यमंत्री को 62 वर्ष से लाभ ले रहे वर्ग की तीन माह से नई भर्तियां नहीं होने से बेरोजगारी की चिंता हो गई, जबकि गुर्जर सहित चार जातियों को विभिन्न सरकारों द्वारा गठित आयोगों व पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने 21वीं सदी में भी अति पिछड़ा वर्ग मानते हुए आरक्षण विधेयक पारित किया था। यह सरकार उससे हमें वंचित करने की साजिश रच रही है। ।
मिला हुआ हक नहीं लुटने देंगे : कुरहार
महवा क्षेत्र के सिंकंदरपुर स्थित बाबू महाराज के मंदिर में राजस्थान गुर्जर छात्रसंघ की बैठक में भी गुर्जरों को विशेष आरक्षण दिए जाने से पहले नई भर्तियां खोले जाने पर आक्रोश जताया गया। जिलाध्यक्ष वीरसिंह कुरहार ने कहा कि गुर्जर मिले हुए हक को नहीं लूटने देंगे। सरकार और सरकार की पैरवी कर रहे गुर्जर नेता समाज को सड़कों पर उतरने को मजबूर कर रहे हैं। बैठक में गुर्जर छात्रसंघ जिला सचिव हेतराम खेड़ला, प्रहलाद पटेल नाहिड़ा, जुहार पटेल सिकंदरपुर सहित अनेक पंच-पटेल मौजूद थे।

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